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बसंत पंचमी

सरस्वती पूजा और बसंत ऋतु का आगमन — माघ शुक्ल पंचमी

बसंत पंचमी क्या है?

बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला पर्व है जो बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। यह पर्व मुख्यतः ज्ञान, विद्या, संगीत और कलाओं की देवी माँ सरस्वती को समर्पित है।

यह क्यों मनाया जाता है?

बसंत पंचमी शीत ऋतु के अवसान और बसंत के आगमन का उत्सव है — नवजीवन, रंग और उल्लास का प्रतीक। श्वेत वस्त्रधारी, श्वेत कमल पर विराजित माँ सरस्वती शुद्ध ज्ञान और सृजनशीलता की देवी हैं। विद्यार्थी, कलाकार और विद्वान इस दिन उनका आशीर्वाद माँगते हैं। पीला रंग — सरसों के खिले फूलों का रंग — इस पर्व का प्रतीक है।

इसे कैसे मनाया जाता है?

सरस्वती की मूर्ति स्थापित की जाती है और श्वेत पुष्प, फल तथा पुस्तकों-वाद्ययंत्रों से पूजा होती है। विद्यार्थी अपनी पुस्तकें और कलम माँ के चरणों में रखकर आशीर्वाद माँगते हैं। पीले वस्त्र पहनना परंपरागत है। बंगाल में स्कूलों-कॉलेजों में बड़े सरस्वती पूजा पंडाल लगते हैं। पंजाब और राजस्थान में पतंगबाजी इस दिन की मुख्य परंपरा है।

यह कब मनाया जाता है?

बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को होती है — सामान्यतः जनवरी या फरवरी में। यह होली से ठीक 40 दिन पहले पड़ती है और बसंत ऋतु का पहला आधिकारिक दिन मानी जाती है।

मुख्य बातें

सरस्वती पूजा

माँ सरस्वती की पुस्तकों, वाद्ययंत्रों और श्वेत पुष्पों से पूजा होती है। इस दिन पढ़ाई न कर पुस्तकें देवी को समर्पित करना परंपरागत है।

पीला रंग

पीला रंग बसंत में खिलती सरसों का प्रतीक है। पीले वस्त्र, केसर भात और बेसन के लड्डू जैसे पीले व्यंजन और पीले फूलों से सजावट इस पर्व के अभिन्न अंग हैं।

विद्यारंभम

बसंत पंचमी शिक्षा आरंभ के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। दक्षिण भारत में 'विद्यारंभम' संस्कार में इस दिन बच्चों के हाथों से पहला अक्षर लिखवाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसंत पंचमी पर पीला रंग क्यों?

पीला रंग बसंत में उत्तर भारत के खेतों में खिलती सरसों के फूलों का प्रतीक है। यह शीत के बाद आने वाले बसंत की ऊष्मा, ऊर्जा और उल्लास का भी प्रतीक है।

क्या बसंत पंचमी विवाह के लिए शुभ है?

हाँ — बसंत पंचमी को विवाह और शुभ कार्यों के लिए वर्ष के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। यह 'अबूझ मुहूर्त' है — इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती।

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