
सटीक पंचांग, शुभ मुहूर्त और शास्त्र-ज्ञान — एक ही स्थान पर।
ब्रह्म मुहूर्त से निशीथ तक — प्रमुख पड़ाव एवं अशुभ काल।
न जायते म्रियते वा कदाचि- न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
यह आत्मा न कभी जन्म लेती है, न मरती है। यह न कभी उत्पन्न होती है, न समाप्त होती है। अजन्मा, नित्य और पुरातन यह आत्मा शरीर के नष्ट होने पर भी नष्ट नहीं होती।
This self is never born and never dies; it does not come into being and then cease to be. Unborn, constant, and ancient, it is not destroyed when the body is destroyed.
Bhagavad Gita 2.20पंचांग, कैलेंडर, पर्व, पाठ, मंदिर और तीर्थ।
पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार।
त्योहार और चंद्र चक्र के साथ मासिक दृश्य।
दिवाली, होली, नवरात्री और अन्य पर्वों की तिथियाँ।
आरती, चालीसा, मंत्र, कथा — नित्य पूजा के पाठ।
प्रमुख मंदिर, उनकी परंपराएँ और दर्शन मार्गदर्शन।
पवित्र तीर्थ स्थल, यात्राएँ और मार्गदर्शन।
मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र और अधिक के लिए गणना उपकरण — जल्द आ रहे हैं।
पर्व, व्रत और गणना की पद्धति पर छोटे लेख।
भारत के प्रमुख मंदिर — दर्शन, परंपरा और मार्गदर्शन।
खगोलीय गणना, पारंपरिक पद्धति, आधुनिक प्रस्तुति।
हर गणना शास्त्रीय ज्योतिष के अनुसार — कोई समझौता नहीं।
संस्कृत पद हिंदी और अंग्रेज़ी में स्पष्ट रूप से समझाए गए।
कोई विज्ञापन नहीं, कोई शोर नहीं — सिर्फ़ पंचांग, साफ़ और केंद्रित।
एक साधक द्वारा साधकों के लिए — हर विवरण में ध्यान के साथ।
न जायते म्रियते वा कदाचि- न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
“This self is never born and never dies; it does not come into being and then cease to be. Unborn, constant, and ancient, it is not destroyed when the body is destroyed.”
— Bhagavad Gita 2.20