✦ आज: शुक्ल पक्ष पूर्णिमा· पूर्णिमा · आज· रक्षाबंधन · आज· जन्माष्टमी · 7 दिन में· एकादशी · 10 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग

आज का पंचांग

📍 पटना · 28 August 2026

आज का सारांश

  • शुक्ल पूर्णिमा 9:49 am तक
  • शतभिषा 3:13 am तक
  • राहु काल: समाप्त
  • आज का शेष समय शुभ माना जाता है।

पंच अंग

तिथिशुक्ल पूर्णिमासमाप्ति 9:49 am
नक्षत्रशतभिषासमाप्ति 3:13 am
योगअतिगण्डसमाप्ति 7:27 am
करणबव → बालव → कौलव
वारशुक्रवार

शुभ मुहूर्त

अभिजित्11:25 am12:16 pm

दिन का सबसे शुभ क्षण, सूर्य के ठीक मध्याह्न पर केंद्रित — किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए पारंपरिक रूप से उत्तम, और सप्ताह के हर दिन सदैव शुभ माना जाने वाला एकमात्र मुहूर्त।

ब्रह्म मुहूर्त3:52 am4:40 am

सूर्योदय से पहले का समय, ध्यान, अध्ययन और साधना के लिए पारंपरिक रूप से सर्वोत्तम माना जाता है।

गोधूलि6:00 pm6:24 pm

सूर्यास्त के आसपास का समय, कुछ संस्कारों — जिनमें विवाह के कुछ भाग भी शामिल हैं — के लिए पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

अशुभ मुहूर्त

राहु काल10:14 am11:50 am
यमगण्ड3:01 pm4:37 pm
गुलिक काल7:03 am8:39 am

आज के समय

सूर्योदय
5:28 am
सूर्यास्त
6:12 pm
चंद्रोदय
6:19 pm
चंद्रास्त
5:21 am
सूर्य राशि
सिंह
चंद्र राशि
कुंभ

होरा

दिन
5:28 am6:31 amशुक्र
6:31 am7:35 amबुध
7:35 am8:39 amचन्द्र
8:39 am9:43 amशनि
9:43 am10:46 amबृहस्पति
10:46 am11:50 amमंगल
11:50 am12:54 pmसूर्य
12:54 pm1:58 pmशुक्र
1:58 pm3:01 pmबुध
3:01 pm4:05 pmचन्द्र
4:05 pm5:09 pmशनि
5:09 pm6:12 pmबृहस्पति

दिन के मुहूर्त

5:28 am6:19 amरुद्र
अशुभ
6:19 am7:10 amअहि
अशुभ
7:10 am8:01 amमित्र
शुभ
8:01 am8:52 amपितृ
अशुभ
8:52 am9:43 amवसु
शुभ
9:43 am10:34 amवराह
शुभ
10:34 am11:25 amविश्वेदेव
शुभ
11:25 am12:16 pmविधि
अशुभ
12:16 pm1:07 pmसुतमुखी
शुभ
1:07 pm1:58 pmपुरुहूत
अशुभ
1:58 pm2:49 pmवाहिनी
अशुभ
2:49 pm3:40 pmनक्तंकरा
अशुभ
3:40 pm4:31 pmवरुण
शुभ
4:31 pm5:21 pmअर्यमा
शुभ
5:21 pm6:12 pmभग
अशुभ

संवत् और मास

मास (पूर्णिमांत)

श्रावण

जल्द आ रहा है

विक्रम संवत्, शक संवत् और ऋतु — अभी स्रोत से प्राप्त नहीं हैं; इनके उपलब्ध होते ही जोड़े जाएँगे।

आज का श्लोक · Verse of the Day

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

स्थिरता में स्थित होकर कर्म कीजिए, उसके प्रति आसक्ति त्यागकर, सफलता और असफलता को समान भाव से देखिए। मन की यही समता योग कहलाती है।

Do your work established in steadiness, letting go of attachment to it, treating success and failure alike. That evenness of mind is what is meant by yoga.

Bhagavad Gita 2.48

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