भाई दूज क्या है?
भाई दूज (भैया दूज, भाई टीका या यम द्वितीया) भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है — दीपावली के दो दिन बाद, पाँच दिवसीय दीपावली उत्सव के अंग के रूप में।
यह क्यों मनाया जाता है?
परंपरा के अनुसार इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने गए। यमुना ने उनका आरती, तिलक और प्रेमपूर्ण भोज से स्वागत किया। यमराज इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने वरदान दिया — जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक प्राप्त करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। बहन भाई की दीर्घायु की कामना करती है; भाई बहन को उपहार और आशीर्वाद देता है।
इसे कैसे मनाया जाता है?
बहन भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाती है और आरती उतारती है। मिठाई और विशेष भोजन परोसती है। भाई बहन को उपहार देता है — प्रेम और रक्षा के प्रतीक के रूप में। कुछ परंपराओं में इस शाम चंद्रदर्शन भी किया जाता है।
यह कब मनाया जाता है?
भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को होता है — सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में, दीपावली के दो दिन बाद।
मुख्य बातें
यम द्वितीया
भाई दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं — यमराज और यमुना के मिलन की कथा के आधार पर, जिसमें यमराज ने बहन के हाथ से तिलक लेने वाले भाइयों को दीर्घायु का वरदान दिया।
दीपावली पर्व श्रृंखला का अंग
भाई दूज दीपावली पर्व श्रृंखला का पाँचवाँ और अंतिम दिन है — धनतेरस, छोटी दीपावली, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
दोनों भाई-बहन के प्रेम के त्योहार हैं। रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) में बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है। भाई दूज (कार्तिक द्वितीया) में बहन माथे पर तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना करती है — यम-यमुना की पौराणिक कथा से प्रेरित।
जिनके भाई-बहन न हों, क्या वे भी भाई दूज मना सकते हैं?
हाँ — यह परंपरा चचेरे भाई-बहनों और घनिष्ठ मित्रों तक भी बढ़ाई जा सकती है। भाई उपलब्ध न हो तो कुछ परंपराओं में चंद्रमा या यमराज को तिलक किया जाता है।
