दशहरा क्या है?
दशहरा (विजयादशमी) आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। यह भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का उत्सव है। यह नवरात्रि के नौ दिनों की आराधना का समापन पर्व है।
यह क्यों मनाया जाता है?
दशहरा धर्म की अधर्म पर, सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है। रावण के दस सिर अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, काम, मद, ईर्ष्या, क्रूरता, स्वार्थ और अन्याय — दस दोषों के प्रतीक हैं। रावण दहन इन्हीं दोषों के विनाश का संदेश देता है। बंगाल में विजयादशमी माँ दुर्गा की विदाई और मूर्ति विसर्जन का भावपूर्ण पर्व है।
इसे कैसे मनाया जाता है?
उत्तर भारत में रामलीला की परिणति रावण दहन के साथ होती है। इस दिन शस्त्र, वाहन और औजारों की पूजा (आयुध पूजा) होती है। दक्षिण भारत में विद्या और कलाओं के उपकरणों की पूजा होती है। बंगाल में सिंदूर खेला और माँ दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन इस दिन की मुख्य परंपरा है।
यह कब मनाया जाता है?
दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को होता है — सामान्यतः अक्टूबर में, नवरात्रि के नौ दिनों के पश्चात।
मुख्य बातें
रावण दहन
50–100 फुट ऊँचे रावण के पुतले का दहन भारत के सबसे भव्य उत्सवों में से एक है — यह अहंकार और अधर्म के अंत का प्रतीक है।
बंगाल में विजयादशमी
पश्चिम बंगाल में पाँच दिनों की दुर्गापूजा के बाद विजयादशमी पर माँ दुर्गा की भावपूर्ण विदाई होती है — महिलाएं सिंदूर खेला करती हैं और मूर्ति का विसर्जन होता है।
आयुध पूजा
विजयादशमी पर विशेषकर दक्षिण भारत में लोग अपने व्यावसायिक औजारों, वाहनों, वाद्ययंत्रों और पुस्तकों की पूजा करते हैं — यह कृतज्ञता का प्रतीक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दशहरा नाम क्यों पड़ा?
एक अर्थ है 'दश-हारा' — दस (रावण के दस सिरों) की हार। दूसरा अर्थ है 'दुःख-हारा' — दस प्रकार के दुःखों और पापों को हरने वाला दिन।
क्या दशहरा पूरे भारत में एक ही तरह मनाया जाता है?
नहीं — क्षेत्रीय परंपराएं अलग-अलग हैं। उत्तर भारत में रामलीला और रावण दहन; बंगाल में दुर्गा मूर्ति विसर्जन; दक्षिण भारत में आयुध पूजा, मैसूर का भव्य दशहरा जुलूस और विद्या पूजन प्रमुख है।