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नाग पंचमी

सर्प-पूजन का पर्व — श्रावण शुक्ल पंचमी

नाग पंचमी क्या है?

नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला सर्प-पूजन का पर्व है। यह हिंदू कैलेंडर के सबसे पवित्र महीनों में से एक — श्रावण — में पड़ता है। हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में नागों का विशेष स्थान है: शेष (अनंत) पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, भगवान शिव के कंठ में वासुकी विराजते हैं, और नाग जल, पृथ्वी और खजाने के रक्षक हैं।

यह क्यों मनाया जाता है?

वर्षाकाल में जब सर्प अपनी बाँबियों से बाहर निकलते हैं, तब उनकी पूजा सुरक्षा और कृपा का आह्वान है। नाग पूजन से सर्पदंश से रक्षा, संतान-प्राप्ति का आशीर्वाद और कुंडली में कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। सर्प कुंडलिनी शक्ति, काल और मृत्यु-पुनर्जन्म के चक्र का भी प्रतीक है।

इसे कैसे मनाया जाता है?

भक्त जीवित सर्पों को (विशेषतः बाँबी में) या नाग की मूर्तियों को दूध, पुष्प, हल्दी, कुमकुम और मिठाई अर्पित करते हैं। महिलाएं घर के प्रवेश द्वार पर गोबर या रंगोली से नाग की आकृति बनाती हैं। अनेक महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मिट्टी की नाग-मूर्तियाँ बनाकर पूजा होती है।

यह कब मनाया जाता है?

नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पंचमी को होती है — सामान्यतः जुलाई या अगस्त में, मानसून के मौसम में। कुछ क्षेत्रों में श्रावण कृष्ण पंचमी को भी यह पर्व मनाया जाता है।

मुख्य बातें

शेष और वासुकि

शेष — समस्त सृष्टि का आधार — और वासुकि — जो भगवान शिव के कंठ में हैं और समुद्र मंथन में रज्जु बने — हिंदू परंपरा के सर्वाधिक पूजित नाग हैं। नाग पंचमी इन्हीं को समर्पित है।

कालसर्प दोष

नाग पंचमी पर नाग पूजन कालसर्प दोष — जिसमें सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं — के प्रभाव को शांत करने में सहायक माना जाता है।

मानसून और सर्पोत्सव

नाग पंचमी मानसून के चरम पर आती है — जब वर्षाजल से भरी बाँबियों से सर्प बाहर निकलते हैं। इस पर्व का समय गहरे पारिस्थितिक अर्थ से युक्त है: प्रकृति के साथ सम्मानपूर्वक जीने की प्राचीन परंपरा का प्रतीक।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या जीवित सर्पों को दूध चढ़ाना सुरक्षित है?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार जीवित सर्प दूध पचा नहीं सकते और यह उनके लिए हानिकारक हो सकता है। नाग के प्रति श्रद्धा की पारंपरिक भावना नाग-मूर्ति, मिट्टी की प्रतिमा या बाँबी पर दूध अर्पित करने से पूर्णतः व्यक्त होती है।

नाग पंचमी और भगवान शिव का क्या संबंध है?

भगवान शिव (नागेश्वर, भोलेनाथ) सर्पों को आभूषण की तरह धारण करते हैं — वासुकि उनके कंठ में है और नाग-कुंडल उनके कानों में। नाग उनके दिव्य स्वरूप का अंग हैं। इसीलिए नाग पंचमी पर नाग-पूजन शिव-पूजन भी माना जाता है।

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