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पाठ/कथा/Ahoi Mata (Parvati)
Ahoi Mata (Parvati) · व्रत कथा

अहोई अष्टमी व्रत कथा

संतान की दीर्घायु, रक्षा और समृद्धि के लिए अहोई माता (अहोई अष्टमी) व्रत कथा

सम्पूर्ण कथा आरती

सम्पूर्ण कथा

कार्तिके कृष्णपक्षे तु अष्टमी तिथिरुत्तमा। अहोईव्रतमुद्दिष्टं मातृभिः पुत्रहेतवे॥ पुरा कश्चिद् गृहे गृहिणी मृत्तिकां खनन्ती सती। अज्ञानात् स्याहीशावकं खुरपेण निहतवती॥

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि अत्यंत उत्तम है, जिस दिन माताएं अपनी संतानों के कल्याण के लिए अहोई व्रत रखती हैं। प्राचीन काल में एक साहुकार की बहु खुरपी से खदान में मिट्टी खोद रही थी। अज्ञानता में उसके हाथ से स्याही (साही) का बच्चा मारा गया।

तस्याः शापेन तद्गृहे सर्वपुत्रा विनशिताः। अहोईमातरं दृष्ट्वा व्रतं कृत्वा विधानतः॥ पुनः लब्ध्वा सुतान् सर्वान् अहोईकृपया सुखी। तस्मात्सर्वैश्च मातृभिः कर्तव्यं व्रतमुत्तमम्॥

उस पाप के प्रायश्चित हेतु साहुकार की बहु ने कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई माता की चित्र बनाकर विधिपूर्वक पूजा व निर्जला व्रत किया तथा दीपदान किया। अहोई माता की अनुकंपा से उसके मृत पुत्र पुनर्जीवित हो गए। तभी से समस्त माताएं संतान रक्षा हेतु अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं।

आरती

मुख्य आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली

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अम्बे तू है जगदम्बे काली। जय दुर्गे खप्पर वाली तेरे भक्त जनों पर, मैया माँ तेरे भक्त जनों पर, भार नहीं कोई भारी॥

हे अम्बे! तू जगत की माता और काली है। हे खप्पर धारिणी दुर्गे! तेरे भक्तों पर कोई बोझ भारी नहीं है — तू सब सँभालती है।

सुर नर मुनि जन सेवत, शरण में तेरी आते। जो भी भक्त शरण में आवे, माँ कर दे उसका काम॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

देव, मनुष्य और मुनि — सभी आपकी सेवा करते और आपकी शरण में आते हैं। जो भी भक्त शरण में आता है, माता उसका काम सिद्ध कर देती है।

सिंह पर आसन, खड्ग त्रिशूल ले। महिषासुर संहारी, तुम हो जगत की माँ॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

आप सिंह पर विराजित हैं और खड्ग तथा त्रिशूल धारण करती हैं। महिषासुर का संहार करने वाली, आप इस जगत् की माता हैं।

तेरे भजन की माया, तेरे नाम की माया। जो करे तेरा ध्यान, उसकी खाली नहीं झोली॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

आपके भजन और नाम में अपार शक्ति है। जो आपका ध्यान करता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती।

नव दुर्गा को ध्यावत, नवरात्र मनावत। भक्त जन आनंद पावत, मैया जय जय करत॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

नव दुर्गा का ध्यान करते हुए, नवरात्र का उत्सव मनाते हुए भक्त आनन्द पाते हैं और माँ की जय-जयकार करते हैं।

अन्य आरतियाँ

जय अम्बे गौरी

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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥