✦ आज: कृष्ण पक्ष तृतीया· जन्माष्टमी · 4 दिन में· एकादशी · 7 दिन में· प्रदोष · 9 दिन में· अमावस्या · 11 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
पाठ/कथा/Ekadashi Devi & Vishnu
Ekadashi Devi & Vishnu · व्रत कथा

एकादशी व्रत कथा

पद्म पुराण से भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्ना एकादशी देवी की प्राकट्य कथा

सम्पूर्ण कथा आरती

सम्पूर्ण कथा

युधिष्ठिर उवाच— एकादश्यास्तु माहात्म्यं श्रोतुमिच्छामि केशव। कथं जाता त्वेकादशी का वा पूज्या च देवता॥ श्रीकृष्ण उवाच— सत्ययुगे मुरासुरो नाम दैत्यश्चासीन्महाबलः। तेन देवाः पराजिताः स्वर्गान्निःसारिता भृशम्॥

युधिष्ठिर ने कहा— हे केशव! मैं एकादशी तिथि का माहात्म्य सुनना चाहता हूँ। एकादशी देवी का प्राकट्य कैसे हुआ और इसकी अधिष्ठात्री देवता कौन हैं? श्री भगवान कृष्ण बोले— सत्ययुग में 'मुर' नाम का अत्यंत बलवान दैत्य था। उसने समस्त देवगणों को पराजित कर स्वर्ग से निष्कासित कर दिया था। (मुख्य तिथि की खगोलीय गणना हेतु हमारी एकादशी व्रत गाइड [Ekadashi Observance](/festival/ekadashi) देखें)।

विष्णुना सह दैत्यस्य युद्धमभवदद्भूतम्। हेमवत्यां गुहायां तु सुप्ते नारायणप्रभौ॥ विष्णोर्देहात्समुत्पन्ना दिव्या कन्या महाबला। सा कन्या निहता दैत्यं मुरं शस्त्रैः समन्ततः॥

भगवान विष्णु के साथ मुर दैत्य का हजार वर्षों तक अद्भुत युद्ध हुआ। तदनंतर जब भगवान नारायण बदरिकाश्रम की हेमवती गुफा में विश्राम कर रहे थे, तब भगवान के दिव्य शरीर से एक अत्यंत तेजस्विनी और महाबली कन्या का प्राकट्य हुआ। उस कन्या ने अपने अस्त्र-शस्त्रों से पापी मुर दैत्य का वध कर दिया।

प्रबुद्धो भगवान् विष्णुराहाहो सुव्रता प्रिये। एकादश्यां समुत्पन्ना तस्मादेकादशी भवेत्॥ मम प्रिया तिथिरेषा सर्वपापहरा शुभा। त्वद्व्रतं ये करिष्यन्ति ते यास्यन्ति परमं पदम्॥

जागने पर भगवान विष्णु ने उस कन्या को देखकर प्रसन्न होकर कहा— हे प्रिये! तुम मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी को मेरे शरीर से प्रकट हुई हो, इसलिए तुम्हारा नाम 'एकादशी' होगा। यह तिथि मुझे अत्यंत प्रिय होगी और समस्त पापों का नाश करने वाली होगी। जो मनुष्य एकादशी व्रत का पालन करेंगे, वे मेरे परम धाम को प्राप्त करेंगे।

आरती

मुख्य आरती

ॐ जय जगदीश हरे

पूरी आरती →

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

हे संपूर्ण जगत् के स्वामी ईश्वर! आपकी जय हो। आप अपने भक्तों और सेवकों के कष्टों तथा संकटों को एक क्षण में दूर कर देते हैं।

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। स्वामी दुख बिनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

जो आपका ध्यान करता है, वह मनोवांछित फल प्राप्त करता है और उसके मन का दुख दूर हो जाता है। उसके घर में सुख-समृद्धि आती है और शरीर के कष्ट मिट जाते हैं।

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी। स्वामी शरण गहूं किसकी। तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

आप ही मेरे माता और पिता हैं, मैं आपके सिवा किसकी शरण में जाऊं? आपके अतिरिक्त मेरा कोई दूसरा नहीं है, जिससे मैं कोई आशा रखूं।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

आप परिपूर्ण परमात्मा और सभी के हृदय की जानने वाले अन्तर्यामी हैं। आप ही परब्रह्म परमेश्वर हैं और समस्त सृष्टि के स्वामी हैं।

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। स्वामी तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

आप दया और करुणा के सागर हैं तथा संपूर्ण जगत् के पालनहार हैं। मैं अज्ञानता और कामनाओं से घिरा हुआ हूँ, हे प्रभु! मुझ पर अपनी कृपा कीजिए।

तुम हो एक अगोचर, सब के प्राणपति। स्वामी सब के प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

आप इन्द्रियों की पहुंच से परे (अगोचर) हैं और सभी जीवों के प्राणों के स्वामी हैं। हे दयालु प्रभु! मुझ जैसा सीमित बुद्धि वाला जीव आपको किस प्रकार प्राप्त कर सकता है?

दीन-बंधु दुख-हर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

आप दीनों के बंधु और दुखों का हरण करने वाले मेरे स्वामी हैं। मैं आपके द्वार पर पड़ा हूँ, अपना कृपाहस्त उठाकर मुझे संभालिए।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

हे देव! मेरे मन के विषय-विकारों और पापों को नष्ट कर दीजिए। मेरे हृदय में श्रद्धा, भक्ति और सत्पुरुषों की सेवा की भावना को बढ़ाइए।

तन मन धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

मेरा शरीर, मन और धन सब कुछ आपका ही दिया हुआ है। जो आपका है, वही आपको समर्पित करता हूँ; इसमें मेरा अपना क्या है?

अन्य आरतियाँ

ॐ जय तुलसी माता

पढ़ें →

ॐ जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता। सब विधि कर कल्याण, जन सुख दाता॥ ॐ जय तुलसी माता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता

पढ़ें →

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥