✦ आज: कृष्ण पक्ष तृतीया· जन्माष्टमी · 4 दिन में· एकादशी · 7 दिन में· प्रदोष · 9 दिन में· अमावस्या · 11 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
ॐ जय लक्ष्मी माता
Lakshmi

ॐ जय लक्ष्मी माता

॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

श्री लक्ष्मी माता की आरती — धन, सुख और समृद्धि की देवी की स्तुति

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

हे लक्ष्मी माता! आपकी जय हो। भगवान विष्णु और ब्रह्मा प्रतिदिन आपकी सेवा करते हैं।

O Goddess Lakshmi, victory to You! Lord Vishnu and Brahma serve You every day without fail.

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

आप ही उमा, रमा और ब्रह्माणी हैं — सम्पूर्ण जगत् की माता। सूर्य और चन्द्रमा आपका ध्यान करते हैं, नारद मुनि आपका गुणगान करते हैं।

You are Uma, Rama, and Brahmani — the mother of the entire universe. Sun and moon meditate upon You, and sage Narada sings Your praises.

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

आप निर्मल दुर्गा स्वरूपा हैं और सुख-सम्पदा की दात्री हैं। जो भी आपका ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और धन की प्राप्ति होती है।

In your pure Durga form, You bestow happiness and prosperity. Whoever meditates upon You gains wealth, supernatural powers, and fulfilment.

तुम पाताल निवासनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव प्रकाशनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

आप पाताल लोक की निवासिनी और कल्याण की दात्री हैं। कर्मों का प्रभाव प्रकाशित करने वाली और संसार-सागर से पार कराने वाली हैं।

You dwell in the netherworld and bestow auspiciousness. You reveal the effect of deeds and are the saviour across the ocean of worldly existence.

जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में है सुख भारी। कर पावन तन-मन को, जो तुमको ध्यावत है नारी॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में आप निवास करती हैं, वहाँ अपार सुख रहता है। जो स्त्री आपका ध्यान करती है, उसके तन और मन को आप पवित्र कर देती हैं।

The home where You reside is filled with great happiness. The woman who meditates upon You finds her body and mind purified.

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जो भी महालक्ष्मी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनन्द भर जाता है और उसके पाप नष्ट हो जाते हैं।

Whoever sings this aarti of Mahalakshmi finds the heart filled with bliss and all sins washed away.

Traditional Hindu devotional text, public domainसभी आरती