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पाठ/कथा/Shiva & Parvati
Shiva & Parvati · व्रत कथा

हरितालिका तीज व्रत कथा

माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किए गए कठोर तप की पावन कथा

सम्पूर्ण कथा आरती

सम्पूर्ण कथा

श्रीभगवानुवाच— शृणु देवि प्रवक्ष्यामि व्रतमेतदनुत्तमम्। भाद्रपदे तृतीयायां हरितालिकाभिधम्॥ पुरा त्वया कृता देवी बाल्ये तपो महान् हि मे। हिमाचलस्य दुर्गे तु गङ्गातीरे मनोहरे॥

भगवान शिव बोले— हे देवी! भाद्रपद शुक्ल तृतीया को किया जाने वाला यह अत्यंत उत्तम 'हरितालिका' व्रत सुनो। प्राचीन काल में बाल्यावस्था में तुमने मुझे पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत के गंडकी नदी के तट पर अत्यंत कठोर तपस्या की थी।

सखीभिर्हरिता यस्माद् अरण्यं गहनं प्रति। तस्माद्धरितालिकेति ख्यातिं लोकेषु संस्थिता॥ वालुकालिङ्गमाश्रित्य रात्रौ जागरण मया। तुष्टोऽहं तेन रूपेण वरं दत्तवान् पतिः॥

चूंकि तुम्हारी सखियों ने तुम्हें पिता के गृह से हरण (अदृश्य) करके सघन वन में पहुंचा दिया था, इसलिए इस व्रत का नाम 'हरितालिका' प्रसिद्ध हुआ। वन में तुमने बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर निराहार-निर्जला व्रत रखा और रात्रि-जागरण किया, जिससे प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।

आरती

मुख्य आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली

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अम्बे तू है जगदम्बे काली। जय दुर्गे खप्पर वाली तेरे भक्त जनों पर, मैया माँ तेरे भक्त जनों पर, भार नहीं कोई भारी॥

हे अम्बे! तू जगत की माता और काली है। हे खप्पर धारिणी दुर्गे! तेरे भक्तों पर कोई बोझ भारी नहीं है — तू सब सँभालती है।

सुर नर मुनि जन सेवत, शरण में तेरी आते। जो भी भक्त शरण में आवे, माँ कर दे उसका काम॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

देव, मनुष्य और मुनि — सभी आपकी सेवा करते और आपकी शरण में आते हैं। जो भी भक्त शरण में आता है, माता उसका काम सिद्ध कर देती है।

सिंह पर आसन, खड्ग त्रिशूल ले। महिषासुर संहारी, तुम हो जगत की माँ॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

आप सिंह पर विराजित हैं और खड्ग तथा त्रिशूल धारण करती हैं। महिषासुर का संहार करने वाली, आप इस जगत् की माता हैं।

तेरे भजन की माया, तेरे नाम की माया। जो करे तेरा ध्यान, उसकी खाली नहीं झोली॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

आपके भजन और नाम में अपार शक्ति है। जो आपका ध्यान करता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती।

नव दुर्गा को ध्यावत, नवरात्र मनावत। भक्त जन आनंद पावत, मैया जय जय करत॥ अम्बे तू है जगदम्बे काली॥

नव दुर्गा का ध्यान करते हुए, नवरात्र का उत्सव मनाते हुए भक्त आनन्द पाते हैं और माँ की जय-जयकार करते हैं।

अन्य आरतियाँ

जय अम्बे गौरी

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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥