शुक्रवार को रखे जाने वाले भगवती वैभव लक्ष्मी व्रत की कल्याणकारी कथा
सम्पूर्ण कथा
नगर्यां कुमुदाख्यायां शीला नाम महासती। लक्ष्मीभक्ता सदा शश्वत् सर्वजीवहिते रता॥ तस्या गृहे समायाता वृद्धा लक्ष्मीस्वरूपिणी। वैभवालक्ष्मीव्रतस्यैवं विधानं समुपैदिशत्॥
कुमुद नगर में शीला नाम की एक अत्यंत पतिव्रता और सद्गुणी स्त्री रहती थी, जो भगवान श्री हरि और माता लक्ष्मी की अनन्य भक्त थी। उसकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं माता लक्ष्मी ने एक वृद्धा का रूप धारण कर उसके घर में प्रवेश किया और उसे ११ या २१ शुक्रवार के 'वैभव लक्ष्मी व्रत' की पावन विधि बतलाई।
शुक्रवारे शुचिः भूत्वा श्रीयंत्रं पूजयेद् भृशम्। खीरं निवेद्य देव्यै तु सर्वान् कामानवाप्नुयात्॥ व्रतस्यास्य प्रभावेण दरिद्रो धनवान् भवेत्। अपुत्रो लभते पुत्रं सत्यमेतन्न संशयः॥
शुक्रवार के दिन पवित्र होकर श्रीयंत्र व महालक्ष्मी के स्वरूप का पूजन करें, चावल और दूध से बनी खीर का भोग लगाएं तथा लाल वस्त्र अर्पित करें। वैभव लक्ष्मी व्रत के प्रभाव से निर्धन व्यक्ति धनवान हो जाता है, संताहीन को संतान की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति का स्थायी वास होता है।
आरती
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