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पाठ/कथा/Lakshmi
Lakshmi · व्रत कथा

वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

शुक्रवार को रखे जाने वाले भगवती वैभव लक्ष्मी व्रत की कल्याणकारी कथा

सम्पूर्ण कथा आरती

सम्पूर्ण कथा

नगर्यां कुमुदाख्यायां शीला नाम महासती। लक्ष्मीभक्ता सदा शश्वत् सर्वजीवहिते रता॥ तस्या गृहे समायाता वृद्धा लक्ष्मीस्वरूपिणी। वैभवालक्ष्मीव्रतस्यैवं विधानं समुपैदिशत्॥

कुमुद नगर में शीला नाम की एक अत्यंत पतिव्रता और सद्गुणी स्त्री रहती थी, जो भगवान श्री हरि और माता लक्ष्मी की अनन्य भक्त थी। उसकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं माता लक्ष्मी ने एक वृद्धा का रूप धारण कर उसके घर में प्रवेश किया और उसे ११ या २१ शुक्रवार के 'वैभव लक्ष्मी व्रत' की पावन विधि बतलाई।

शुक्रवारे शुचिः भूत्वा श्रीयंत्रं पूजयेद् भृशम्। खीरं निवेद्य देव्यै तु सर्वान् कामानवाप्नुयात्॥ व्रतस्यास्य प्रभावेण दरिद्रो धनवान् भवेत्। अपुत्रो लभते पुत्रं सत्यमेतन्न संशयः॥

शुक्रवार के दिन पवित्र होकर श्रीयंत्र व महालक्ष्मी के स्वरूप का पूजन करें, चावल और दूध से बनी खीर का भोग लगाएं तथा लाल वस्त्र अर्पित करें। वैभव लक्ष्मी व्रत के प्रभाव से निर्धन व्यक्ति धनवान हो जाता है, संताहीन को संतान की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति का स्थायी वास होता है।

आरती

मुख्य आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता

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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

हे लक्ष्मी माता! आपकी जय हो। भगवान विष्णु और ब्रह्मा प्रतिदिन आपकी सेवा करते हैं।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

आप ही उमा, रमा और ब्रह्माणी हैं — सम्पूर्ण जगत् की माता। सूर्य और चन्द्रमा आपका ध्यान करते हैं, नारद मुनि आपका गुणगान करते हैं।

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

आप निर्मल दुर्गा स्वरूपा हैं और सुख-सम्पदा की दात्री हैं। जो भी आपका ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और धन की प्राप्ति होती है।

तुम पाताल निवासनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव प्रकाशनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

आप पाताल लोक की निवासिनी और कल्याण की दात्री हैं। कर्मों का प्रभाव प्रकाशित करने वाली और संसार-सागर से पार कराने वाली हैं।

जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में है सुख भारी। कर पावन तन-मन को, जो तुमको ध्यावत है नारी॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में आप निवास करती हैं, वहाँ अपार सुख रहता है। जो स्त्री आपका ध्यान करती है, उसके तन और मन को आप पवित्र कर देती हैं।

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जो भी महालक्ष्मी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनन्द भर जाता है और उसके पाप नष्ट हो जाते हैं।

अन्य आरतियाँ

ॐ जय जगदीश हरे

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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥