
जय भोला भंडारी
Jai Bhola Bhandari
Devotional aarti of Lord Shiva — the simple-hearted one who bestows all blessings freely
जय भोला भंडारी, नंदी के असवारी। गंगा जटा से निकलती, पूजा करे नर नारी॥ ओम जय शिव शंकर, ओम जय शिव शंकर।
भोले नाथ की जय हो, जो नंदी पर सवार हैं। गंगा उनकी जटाओं से निकलती है, सभी स्त्री-पुरुष उनकी पूजा करते हैं।
Glory to Bholanath who rides Nandi. Ganga flows from his matted locks; all devotees — men and women — worship him.
त्रिपुंड लगाए, भस्म रमाए। बाघम्बर ओढ़े, रुद्राक्ष धारी॥ ओम जय शिव शंकर, ओम जय शिव शंकर।
त्रिपुंड तिलक लगाए, भस्म से विभूषित, बाघ की खाल ओढ़े और रुद्राक्ष की माला धारण किए।
Adorned with tripunda tilak and sacred ash, draped in tiger skin and wearing a garland of rudraksha beads.
शिव की आरती जो कोई गावे। भक्ति-मुक्ति दोनों पावे॥ ओम जय शिव शंकर, ओम जय शिव शंकर।
जो कोई भी शिव की इस आरती को गाता है, उसे भक्ति और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
Whoever sings this aarti of Shiva attains both devotion and liberation.
अर्ध नारीश्वर रूपा, शंकर-पार्वती। सदा सर्वदा सहाय हो, मेरी बिगड़ी बनाए॥ ओम जय शिव शंकर, ओम जय शिव शंकर।
अर्धनारीश्वर के रूप में शिव और पार्वती सदा सहाय हों और मेरी बिगड़ी बात को बनाएँ।
In the form of Ardhanarishvara — Shiva and Parvati united — may they always help me and turn my misfortune into good fortune.
जय जय जय महादेव, जय जय जय शंकर। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करें॥ ओम जय शिव शंकर, ओम जय शिव शंकर।
महादेव की जय हो, शंकर की जय हो। वे भक्तों के संकट को पल भर में दूर कर देते हैं।
Victory to Mahadeva, victory to Shankara. In an instant he removes the suffering of all devotees.


