
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति
Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti
Traditional Marathi aarti of Lord Ganesha — the auspicious form who fulfils all desires
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति। दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥ जय देव जय देव।
हे मंगलमूर्ति! आपकी जय हो। आपके दर्शन मात्र से मन की कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।
Victory to the auspicious form! By merely having your darshan, all desires of the heart are fulfilled.
गणराज विघ्नहर्ता, सबका सुखकर्ता। लम्बोदर एकदंत, जग का भाग्य विधाता॥ जय देव जय देव।
गणराज विघ्न हरने वाले और सबका सुख करने वाले हैं। लंबोदर और एकदंत — जगत के भाग्य-विधाता।
Ganaraja removes obstacles and brings happiness to all. Pot-bellied, single-tusked — he determines the fate of the world.
सिद्धि-बुद्धि के दाता, ऋद्धि-सिद्धि पति। प्रथम पूज्य गणेश, सर्व विघ्न हरणकर्ती॥ जय देव जय देव।
सिद्धि और बुद्धि के दाता, ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी; सर्वप्रथम पूजे जाने वाले गणेश जो सभी विघ्न हरते हैं।
Giver of accomplishment and wisdom, lord of Riddhi and Siddhi; first to be worshipped, remover of all obstacles.
चंदन अक्षत पुष्पे, धूप-दीप आरती। मोदक नैवेद्य भावे, स्वीकारो प्रभु स्वामी॥ जय देव जय देव।
चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीपक और मोदक के नैवेद्य के साथ यह आरती स्वीकार करें, हे प्रभु।
Accept this offering of sandalwood, rice, flowers, incense, lamp, and modak, O Lord.
जय देव जय देव की आरती गाएँ। गणपति कृपा से सब काम सिद्ध होएँ॥ जय देव जय देव।
जय देव जय देव की आरती गाएँ — गणपति की कृपा से सभी कार्य सिद्ध हों।
Sing this aarti — by Ganapati's grace all tasks are accomplished.


