✦ आज: कृष्ण पक्ष तृतीया· जन्माष्टमी · 4 दिन में· एकादशी · 7 दिन में· प्रदोष · 9 दिन में· अमावस्या · 11 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
Jai Jai Brahma Deva
Brahma

जय जय ब्रह्म देव

॥ जय जय ब्रह्म देव ॥

भगवान ब्रह्मा की आरती — सृष्टि के रचयिता, कमल पर विराजित, वेद धारण किए

जय जय ब्रह्म देव, जय जय ब्रह्म देव। चतुर्मुखी सृजनकर्ता, वेद-पुराण प्रेव॥ जय जय ब्रह्म देव।

हे ब्रह्म देव! आपकी जय हो। चार मुखों वाले सृजनकर्ता जो वेद और पुराणों के प्रणेता हैं।

Victory to Brahma Deva! Four-faced creator, originator of the Vedas and Puranas.

कमल-आसन बैठे, सरस्वती संगी। त्रिमूर्ति में प्रथम, सृष्टि के रंगी॥ जय जय ब्रह्म देव।

कमल के आसन पर बैठे, सरस्वती के साथ; त्रिमूर्ति में प्रथम, सृष्टि के रचयिता।

Seated on a lotus, accompanied by Saraswati; first of the Trinity, painter of creation.

पुष्कर तीर्थ में पूजित, अजर-अमर ईश। आयु-बुद्धि-विद्या दो, पूर्ण करो जगदीश॥ जय जय ब्रह्म देव।

पुष्कर तीर्थ में पूजे जाते हैं, अजर-अमर ईश्वर। आयु, बुद्धि और विद्या दो, हे जगदीश।

Worshipped at Pushkar, the ageless immortal Lord; grant long life, wisdom, and learning.

जय जय ब्रह्म देव की आरती जो गाए। ज्ञान-विद्या-सृजन का वरदान पाए॥ जय जय ब्रह्म देव।

जो ब्रह्म देव की यह आरती गाता है उसे ज्ञान, विद्या और सृजन-शक्ति का वरदान मिलता है।

Whoever sings this aarti of Brahma Deva receives the boon of knowledge, learning, and creativity.

Traditional Vedic Aartiसभी आरती