
जय दुर्गा भवानी
माँ दुर्गा भवानी की आरती — अपने दिव्यतम रूप में विश्व-जननी की स्तुति
जय दुर्गा भवानी, जय जय माँ भवानी। दसों भुजाओं से सजी, जगत की रानी॥ जय दुर्गा भवानी।
हे दुर्गा भवानी! आपकी जय हो। दस भुजाओं से सुसज्जित, जगत की रानी।
Victory to Durga Bhavani! Adorned with ten arms, queen of the world.
महिष-मर्दन रूपा, त्रिशूल धारिणी। सिंहासन-सिंह-सवारी, अंधकार-हारिणी॥ जय दुर्गा भवानी।
महिष का मर्दन करने वाली, त्रिशूल धारण किए, सिंहासन पर सिंह की सवारी करती और अंधकार को दूर करती हैं।
Slayer of Mahisha, wielding the trident, riding a lion on her throne, destroying all darkness.
नवरात्रि-पूजन में, भक्त पूजें जब। श्रद्धा-भाव रखें तो, माँ आतीं तब॥ जय दुर्गा भवानी।
जब भक्त नवरात्रि में श्रद्धा-भाव से पूजन करते हैं, तब माँ प्रकट होती हैं।
When devotees worship with faith during Navratri, the Mother manifests before them.
जय दुर्गा भवानी की आरती जो गाए। दुर्गति दूर हो, सद्गति पाए॥ जय दुर्गा भवानी।
जो दुर्गा भवानी की यह आरती गाता है उसकी दुर्गति दूर होती है और सद्गति मिलती है।
Whoever sings this aarti of Durga Bhavani is freed from misfortune and attains a blessed state.



