
जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी
माँ दुर्गा की आरती — जो दुर्गति का नाश करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं
जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी, जय जय महिषासुर मर्दिनी। त्रिभुवन पालिनी, सिंह वाहिनी, जय जय माँ जगदम्बे॥
हे दुर्गे! दुर्गति को दूर करने वाली, महिषासुर का मर्दन करने वाली, तीनों लोकों की पालन करने वाली, सिंह पर सवार माँ जगदम्बे की जय हो।
Glory to Durga, remover of misfortune; slayer of Mahishasura; protector of all three worlds; riding a lion — victory to Mother Jagadamba.
अष्टभुजी माँ सज्जित शस्त्रों से। रक्त बीज मार डाले, भय से मुक्त करे॥ जय जय माँ जगदम्बे।
आठ भुजाओं में शस्त्र धारण किए हुए, रक्तबीज राक्षस का नाश करके सभी को भय से मुक्त करने वाली।
Eight-armed, wielding weapons; she slew the demon Raktabija and freed all from fear.
शुम्भ-निशुम्भ संहारी, चण्ड-मुण्ड विनाशिनी। धर्म की रक्षा करती, सत्य की प्रकाशिनी॥ जय जय माँ जगदम्बे।
शुम्भ-निशुम्भ का नाश करने वाली, चंड-मुंड को मिटाने वाली, धर्म की रक्षक और सत्य की प्रकाश देने वाली।
Destroyer of Shumbha-Nishumbha and Chanda-Munda; protector of dharma and light of truth.
नवदुर्गा के नौ रूप, नौ-रात्रि पूजित। आदि शक्ति की जय हो, जग में विराजित॥ जय जय माँ जगदम्बे।
नवदुर्गा के नौ रूप, नवरात्रि में पूजित; आदि शक्ति जो समस्त ब्रह्मांड में विराजमान हैं।
Nine forms of Navdurga, worshipped through nine sacred nights — Adi Shakti enthroned in the universe.
जो नर-नारी ये आरती गावे। दुर्गा कृपा से मनोकामना पावे॥ जय जय माँ जगदम्बे।
जो स्त्री-पुरुष यह आरती गाते हैं, माँ दुर्गा की कृपा से उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।
Men and women who sing this aarti will have their wishes fulfilled by the grace of Durga.



