
जय गायत्री माता
माँ गायत्री की आरती — वेदों की माता जो बुद्धि को प्रकाशित करती हैं
जय गायत्री माता, मैया जय गायत्री माता। पञ्चमुखी महाशक्ति, तू जग की विधाता॥ जय गायत्री माता।
हे माँ गायत्री! आपकी जय हो। पाँच मुखों वाली महाशक्ति, आप समस्त जगत की विधाता हैं।
Victory to Mother Gayatri! Five-faced great power, creator and sustainer of the world.
वेदों की तू माता, वाणी की देवी। चारों वेद तुझसे, बुद्धि प्रकाशी भवि॥ जय गायत्री माता।
आप वेदों की माता और वाणी की देवी हैं। चारों वेद आपसे प्रकट हुए और आप बुद्धि को प्रकाशित करती हैं।
Mother of the Vedas, goddess of speech; all four Vedas arose from you, illumining the intellect.
सूर्य की प्रिय शक्ति, ब्रह्मा की पत्नी। त्रिगुणमयी माता, भक्तन की स्वामिनी॥ जय गायत्री माता।
सूर्य की प्रिय शक्ति, ब्रह्मा की पत्नी; तीनों गुणों वाली माता, भक्तों की स्वामिनी।
Beloved power of the Sun, consort of Brahma; the mother embodying three qualities, sovereign of devotees.
गायत्री मंत्र जपे जो नित भक्ति से। बुद्धि-विवेक पाए वो कृपा-दृष्टि से॥ जय गायत्री माता।
जो नित्य भक्ति से गायत्री मंत्र का जप करता है, उसे माता की कृपा-दृष्टि से बुद्धि और विवेक मिलता है।
One who chants the Gayatri Mantra daily with devotion receives wisdom and discernment by the Mother's grace.
जय गायत्री माता की आरती जो गाए। बुद्धि-ज्ञान-विवेक का वरदान पाए॥ जय गायत्री माता।
जो माँ गायत्री की यह आरती गाता है उसे बुद्धि, ज्ञान और विवेक का वरदान प्राप्त होता है।
Whoever sings this aarti of Mother Gayatri receives the boon of wisdom, knowledge, and discernment.



