
जय गोविंद जय गोपाल
गोविंद-गोपाल रूप में श्री कृष्ण की आरती — जो गाय और भक्तों दोनों की रक्षा करते हैं
जय गोविंद जय गोपाल, जय जय मुरलीधारी। नंद के लाला, यशोदा के दुलारे, वृंदावन बिहारी॥ जय गोविंद जय गोपाल।
हे गोविंद! हे गोपाल! मुरली धारण करने वाले की जय हो। नंद के लाले, यशोदा के दुलारे, वृंदावन के विहारी।
Victory to Govinda-Gopal, the flute-bearer! Nanda's delight, Yashoda's cherished one, wanderer of Vrindavan.
गाय चराते कान्हा, वन-वन फिरते। ग्वाल-बाल सब संग, माखन चुराते॥ जय गोविंद जय गोपाल।
कान्हा गाएँ चराते हुए वनों में घूमते हैं और ग्वाल-बालों के साथ माखन चुराते हैं।
Krishna herds cows through the forests, stealing butter with all the cowherd boys.
कालिया नाग दमन, गोवर्धन उठाए। इंद्र का मान तोड़ा, वृज को बचाए॥ जय गोविंद जय गोपाल।
कालिया नाग का दमन किया, गोवर्धन पर्वत उठाया, इंद्र का मान तोड़कर वृज की रक्षा की।
He subdued Kaliya the serpent, lifted Govardhan hill, humbled Indra's pride, and protected Braj.
जय गोविंद जय गोपाल की आरती गाओ। कृष्ण-भक्ति की धारा में मन डुबाओ॥ जय गोविंद जय गोपाल।
जय गोविंद जय गोपाल की आरती गाओ और कृष्ण-भक्ति की धारा में मन डुबाओ।
Sing this aarti of Govinda-Gopal and immerse your mind in the stream of Krishna's devotion.



