
जय कार्तिक स्वामी
भगवान कार्तिकेय की आरती — शिव-पार्वती के पुत्र, देवताओं के सेनापति
जय कार्तिक स्वामी, जय मुरुगन स्वामी। शक्ति-शूल धारण, देव-सेनापति॥ जय कार्तिक स्वामी।
हे कार्तिक स्वामी! हे मुरुगन! आपकी जय हो। शक्ति और शूल धारण किए देवताओं के सेनापति।
Victory to Kartik Swami, victory to Murugan! Wielding spear and Shakti, commander of the celestial armies.
षडानन सुंदर रूपा, शिव-पार्वती के सुत। मोर पर सवारी करते, तारकासुर जीत॥ जय कार्तिक स्वामी।
छह मुखों वाले सुंदर रूप में, शिव-पार्वती के पुत्र, मोर पर सवार और तारकासुर को जीतने वाले।
Beautiful with six faces, son of Shiva-Parvati, riding a peacock and victorious over Tarakasura.
वेल मुरुगन कहाए, दक्षिण के देव। क्रौंच पर्वत भेदन, शत्रु का निर्भेद॥ जय कार्तिक स्वामी।
वेल-मुरुगन कहलाते हैं, दक्षिण भारत के प्रिय देव। क्रौंच पर्वत को भेदकर शत्रु का नाश किया।
Called Vel Murugan, beloved deity of South India; he pierced Mount Kraunch and vanquished all enemies.
जय कार्तिक स्वामी की आरती जो गाए। साहस-बल-वीरता का वरदान पाए॥ जय कार्तिक स्वामी।
जो कार्तिक स्वामी की यह आरती गाता है उसे साहस, बल और वीरता का वरदान मिलता है।
Whoever sings this aarti of Kartik Swami receives the boon of courage, strength, and valor.



