
जय कुबेर महाराज
भगवान कुबेर की आरती — देवताओं के कोषाध्यक्ष और समस्त सम्पदा के स्वामी
जय कुबेर महाराज, जय धन के दाता। यक्षराज विराजे, स्वर्ण लोक के विधाता॥ जय कुबेर महाराज।
हे कुबेर महाराज! धन देने वाले आपकी जय हो। यक्षराज, स्वर्णलोक के विधाता।
Victory to Kubera Maharaj, giver of wealth! King of Yakshas, sovereign of the golden realm.
अलकापुरी के राजा, धन-कोश के स्वामी। त्रिकूट पर बसते, धनपति महामी॥ जय कुबेर महाराज।
अलकापुरी के राजा, धन-कोश के स्वामी; त्रिकूट पर्वत पर निवास करने वाले महान धनपति।
King of Alkapuri, master of the treasury; the great lord of wealth residing on Mount Trikut.
लक्ष्मी-सिद्धि-समृद्धि दो, दरिद्रता हटाओ। शुक्र-गुरु की पूजा में, कुबेर स्मरण लाओ॥ जय कुबेर महाराज।
लक्ष्मी, सिद्धि और समृद्धि दो, दरिद्रता हटाओ। शुक्र और गुरुवार की पूजा में कुबेर का स्मरण करो।
Grant Lakshmi, accomplishment, and prosperity; remove poverty. Remember Kubera in Friday and Thursday worship.
जय कुबेर महाराज की आरती जो गाए। धन-सम्पत्ति घर में सदा बनी जाए॥ जय कुबेर महाराज।
जो कुबेर महाराज की यह आरती गाता है उसके घर में धन-सम्पत्ति सदा बनी रहती है।
Whoever sings this aarti of Kubera Maharaj shall have wealth and prosperity always at home.



