
जय माँ बगलामुखी
माँ बगलामुखी की आरती — दस महाविद्याओं में आठवीं, शत्रुओं का स्तम्भन करने वाली
जय माँ बगलामुखी, जय पीताम्बरी माता। शत्रु-स्तम्भन करती, भक्तन की रक्षाता॥ जय माँ बगलामुखी।
हे माँ बगलामुखी! पीले वस्त्र पहनने वाली की जय हो। शत्रुओं का स्तम्भन करती और भक्तों की रक्षा करती हैं।
Glory to Mother Baglamukhi, the yellow-clad one! She paralyzes enemies and protects her devotees.
पीले पुष्प चढ़ाते, पीला भोग लगाते। हल्दी-पीत-वस्त्र से, माँ को मनाते॥ जय माँ बगलामुखी।
पीले पुष्प, पीले भोग और हल्दी-पीले वस्त्रों से माँ को प्रसन्न किया जाता है।
Yellow flowers, yellow offerings, and turmeric-dyed clothes are offered to please the Mother.
शत्रुनाशिनी तू माँ, बाधाओं को हरे। साधक की रक्षा कर, सब संकट टरे॥ जय माँ बगलामुखी।
शत्रुओं का नाश करने वाली, बाधाओं को दूर करने वाली, साधक की रक्षा करके सब संकट हरने वाली।
Destroyer of enemies, remover of obstacles; protect the seeker and ward off all troubles.
जय माँ बगलामुखी की आरती जो गाए। शत्रु-बाधा से रक्षा, विजय सदा पाए॥ जय माँ बगलामुखी।
जो माँ बगलामुखी की यह आरती गाता है उसे शत्रु और बाधाओं से रक्षा मिलती है और विजय प्राप्त होती है।
Whoever sings this aarti of Baglamukhi is protected from enemies and obstacles, and always triumphs.



