
जय मंगलमूर्ति गणेश
मंगलमूर्ति गणपति की आरती — हर शुभ कार्य के प्रारंभ में पूजित
जय मंगलमूर्ति गणेश, प्रथम पूज्य देव। सिद्धि-बुद्धि के स्वामी, विघ्न-विनाशक देव॥ जय मंगलमूर्ति।
मंगलमूर्ति गणेश की जय हो — सबसे पहले पूजे जाने वाले देव, सिद्धि और बुद्धि के स्वामी, विघ्न नाशक।
Glory to auspicious Ganesha, the first to be worshipped; lord of accomplishment and wisdom, destroyer of obstacles.
हाथी-मुख, चूहे-वाहन, गजानन भगवान। लम्बोदर एकदंत, करते कल्याण॥ जय मंगलमूर्ति।
हाथी के मुख वाले, चूहे की सवारी करने वाले, गजानन भगवान; लम्बोदर और एकदंत — सबका कल्याण करते हैं।
Elephant-faced, riding a mouse, Gajanana; pot-bellied, single-tusked — he brings welfare to all.
दूर्वा-मोदक-पुष्प, भोग स्वीकारें। कार्य-सिद्धि करने को, शीघ्र पधारें॥ जय मंगलमूर्ति।
दूर्वा, मोदक और पुष्पों का भोग स्वीकार करें और कार्य-सिद्धि के लिए शीघ्र पधारें।
Accept offerings of durva grass, modak, and flowers; come swiftly to grant accomplishment of tasks.
जय मंगलमूर्ति की आरती जो गाए। कार्य-सिद्धि-गणपति कृपा पाए॥ जय मंगलमूर्ति।
जो मंगलमूर्ति की यह आरती गाता है उसे गणपति की कृपा और कार्य-सिद्धि प्राप्त होती है।
Whoever sings this aarti of Mangal Murti receives Ganapati's grace and accomplishment of tasks.


