✦ आज: कृष्ण पक्ष तृतीया· जन्माष्टमी · 4 दिन में· एकादशी · 7 दिन में· प्रदोष · 9 दिन में· अमावस्या · 11 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
Jai Sati Mata
Sati Mata

जय सती माता

॥ जय सती माता ॥

माँ सती की आरती — शिव की प्रथम पत्नी और शाश्वत भक्ति की प्रतीक

जय सती माता, मैया जय सती माता। दक्ष-पुत्री विराजें, शिव की प्रिय माता॥ जय सती माता।

हे माँ सती! आपकी जय हो। दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की प्रिय अर्धांगिनी।

Glory to Mother Sati! Daughter of Daksha, beloved consort of Lord Shiva.

यज्ञ-कुंड में कूद, प्राण त्यागे अपना। सती-धर्म का मान, रखा जग में अपना॥ जय सती माता।

यज्ञ-कुंड में कूदकर प्राण त्यागे। सती के धर्म का मान जग में स्थापित किया।

She leapt into the sacred fire and gave up her life, establishing the honour of a wife's devotion in the world.

शिव-विरह में व्याकुल, ५१ शक्तिपीठ। जहाँ गिरे अंग उनके, वहाँ देवी प्रतीत॥ जय सती माता।

शिव के विरह में व्याकुल, जहाँ उनके अंग गिरे वहाँ 51 शक्तिपीठ स्थापित हुए।

Grieved by separation from Shiva; where her limbs fell, 51 sacred Shakti Peethas arose.

जय सती माता की आरती जो गाए। पति-प्रेम-सौभाग्य का, वरदान पाए॥ जय सती माता।

जो माँ सती की यह आरती गाता है उसे पति-प्रेम और सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।

Whoever sings this aarti of Sati Mata receives the boon of spousal love and good fortune.

Traditional Shakta Aartiसभी आरती