
जय जय श्री शनिदेव
श्री शनिदेव की आरती — सूर्य पुत्र, कर्मफलदाता शनि महाराज की स्तुति
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूर्य के पुत्र प्रभो! कृपा कीजे हमारी॥ जय जय श्री शनिदेव॥
हे भक्तों के कल्याणकारी, सूर्य पुत्र शनिदेव! आपकी जय हो। हम पर कृपा कीजिए।
Victory to Lord Shani, benefactor of devotees, son of Surya! O Lord, bestow Your grace upon us.
श्याम अंग वक्र दृष्टि, चतुर्भुज धारी। नीलांबर धार नाथ, गर्दभ सवारी॥ जय जय श्री शनिदेव॥
श्याम वर्ण, वक्र दृष्टि वाले, चार भुजाधारी, नीले वस्त्र धारण किए और गधे पर सवारी करने वाले शनिदेव।
Dark-complexioned, with a slanted gaze, four-armed, clad in blue raiment, and riding a donkey.
कृपा करो भक्तन पर, दाता कर्मों के। जो भी ध्यान धरत है, मोचन बंधन के॥ जय जय श्री शनिदेव॥
हे कर्मफल के दाता! अपने भक्तों पर कृपा कीजिए। जो आपका ध्यान करता है, वह बंधनों से मुक्त होता है।
O giver of the fruits of deeds, be merciful to your devotees. Whoever meditates upon You is freed from all bondage.
पौराणिक महिमा तव, भक्त जन जानत। शनिवार व्रत कीजे, सुख शांति पानत॥ जय जय श्री शनिदेव॥
आपकी पौराणिक महिमा को भक्त जन जानते हैं। शनिवार का व्रत करने से सुख और शान्ति की प्राप्ति होती है।
Devotees know your legendary glory from the Puranas. Observing Saturday fasts brings happiness and peace.
तेल और काले तिल, उड़द दाल चढ़ावत। शनिदेव प्रसन्न होकर, शुभ फल देत भावत॥ जय जय श्री शनिदेव॥
तेल, काले तिल और उड़द दाल चढ़ाने से शनिदेव प्रसन्न होकर शुभ फल प्रदान करते हैं।
Oil, black sesame seeds, and black lentils are offered; pleased by these, Shani Dev bestows auspicious blessings.



