
जय शीतला माता
माँ शीतला की आरती — जो शीतल शरीर वाली देवी पॉक्स और बुखार से रक्षा करती हैं
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता। स्वच्छ-शीतल रूप तेरा, जग का तू विधाता॥ जय शीतला माता।
हे माँ शीतला! आपकी जय हो। आपका रूप शुद्ध और शीतल है — आप जग की विधाता हैं।
Glory to Mother Sheetala! Your form is pure and cool — you are the sustainer of the world.
चेचक-ज्वर हरती, बीमारी दूर करे। खट्टे-मिठे नैवेद्य, प्रेम से स्वीकारे॥ जय शीतला माता।
चेचक और बुखार को दूर करती हैं और बीमारियाँ मिटाती हैं। खट्टे और मीठे नैवेद्य को प्रेम से स्वीकार करती हैं।
She removes pox and fever, eliminating disease; she lovingly accepts sour and sweet offerings.
गर्दभ पर सवारी, ठंडा जल लाएँ। सप्तमी को पूजे जो, वर्ष भर सुख पाएँ॥ जय शीतला माता।
गधे पर सवार, ठंडा जल लिए आती हैं। शीतला सप्तमी को जो पूजता है उसे वर्षभर सुख मिलता है।
Riding a donkey, carrying cool water; one who worships on Sheetala Saptami finds happiness all year.
जय शीतला माता की आरती जो गाए। रोग-दोष मिटे, आरोग्य पाए॥ जय शीतला माता।
जो शीतला माता की यह आरती गाता है उसके रोग-दोष मिटते हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
Whoever sings this aarti of Sheetala Mata is freed from disease and obtains good health.



