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अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
Jai Jai Vishwakarma Prabhu
Vishwakarma

जय जय विश्वकर्मा प्रभु

॥ जय जय विश्वकर्मा प्रभु ॥

श्री विश्वकर्मा की आरती — देवताओं के दिव्य शिल्पी और सृजनकर्ता

जय जय विश्वकर्मा प्रभु, जय जय विश्वकर्मा। स्वर्ग लोक के शिल्पी, देवों के निर्माता॥ जय जय विश्वकर्मा।

हे विश्वकर्मा प्रभु! आपकी जय हो। आप स्वर्गलोक के शिल्पी और देवताओं की रचनाओं के निर्माता हैं।

Victory to Lord Vishwakarma! Architect of heaven and creator of all divine structures.

ब्रह्मा के मानस पुत्र, शिल्पों के ज्ञाता। देवपुरी-द्वारका, लंका के विधाता॥ जय जय विश्वकर्मा।

ब्रह्मा के मानस पुत्र, शिल्प-विद्या के ज्ञाता; देवपुरी, द्वारका और लंका के निर्माता।

Mind-born son of Brahma, master of all crafts; builder of Devapuri, Dwarka, and Lanka.

पुष्पक विमान बनाए, अस्त्र-शस्त्र भी। सुदर्शन चक्र रचाए, इन्द्र के वज्र भी॥ जय जय विश्वकर्मा।

पुष्पक विमान, अस्त्र-शस्त्र, सुदर्शन चक्र और इंद्र के वज्र सभी उन्हीं के हाथों की रचना है।

Pushpaka Vimana, celestial weapons, Sudarshana Chakra, and Indra's thunderbolt — all crafted by his hands.

कारीगर और शिल्पी, कर जोड़ पूजते। विश्वकर्मा आशीष दो, हमें सफल करते॥ जय जय विश्वकर्मा।

कारीगर और शिल्पी हाथ जोड़कर पूजा करते हैं। हे विश्वकर्मा! हमें आशीर्वाद दो और सफल बनाओ।

All craftsmen and artisans worship you with folded hands. Bless us, Vishwakarma, and grant us success.

जय जय विश्वकर्मा की आरती जो गाए। कला-कौशल की शक्ति उसे खूब मिल जाए॥ जय जय विश्वकर्मा।

जो विश्वकर्मा की यह आरती गाता है उसे कला और कौशल की शक्ति प्रचुरता से मिलती है।

Whoever sings this aarti of Vishwakarma receives abundant strength in art and skill.

Traditional Vishwakarma Puja Aartiसभी आरती