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हनुमान

परम रामभक्त संकटमोचन — असीम बल, बुद्धि और निष्काम सेवा के प्रतीक

हनुमान
पावन नामावली:बजरंगबलीमारुतिआंजनेयपवनपुत्रसंकटमोचनमहावीर

श्री हनुमान भगवान शिव के रुद्रावतार और प्रभु श्री राम के अनन्य सेवक हैं। वे अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता, भयनाशक और असीम शक्ति के पुंज हैं।

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पवित्र ध्यान श्लोक

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

atulitabaladhāmaṁ hemaśailābhadehaṁ danujavanakṛśānuṁ jñānināmagragaṇyam | sakalaguṇanidhānaṁ vānarāṇāmadhīśaṁ raghupatipriyabhaktaṁ vātajātaṁ namāmi ||

भावार्थ: अतुल बल के धाम, सुवर्ण पर्वत (सुमेरु) के समान कांतिमान शरीर वाले, राक्षसों रूपी वन को भस्म करने वाले, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सभी सद्गुणों के भंडार, श्री राम के परम प्रिय भक्त पवनपुत्र हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ।

स्रोत: Ramacharitmanas, Sundarakanda Mangalacharana (Goswami Tulsidas)
दिव्य वाहनपवन-वेग से आकाश में गतिमानबंधन-मुक्ति, तीव्र गति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
गदा (अजेय आत्मबल का प्रतीक)द्रोणागिरि पर्वत (संजीवनी बूटी)
हस्त मुद्राएं
अंजलि मुद्रा (करबद्ध प्रार्थना)अभय मुद्रा (संकट-निवारण)
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पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रRamanandi & Puranic Tradition
ॐ हनुमते नमःसमस्त भयों को दूर करने वाले श्री हनुमान जी को नमन।प्रयोग: भय, बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति हेतु दैनिक जप
गायत्री मंत्रPuranic Gayatri Canon
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥हम माता अंजना के पुत्र को जानते हैं, पवनपुत्र का ध्यान करते हैं; वे वीर हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर चलाएं।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Tantric Hanuman Upasana (Mantra Mahodadhi)
ह्रौं / हं (Hraum / Pavan)प्राण शक्ति और अजेय पराक्रम का बीज मंत्र।ℹ️ रक्षा कवच एवं विशेष अनुष्ठान में प्रयुक्त।
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जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (2)
🏔️ तीर्थ परिपथ (यात्रा)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: चैत्र पूर्णिमा को उत्तर और पश्चिम भारत में हनुमान जयंती के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) को भी कई क्षेत्रों में हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है।
पूजन वार (दिन): मंगलवार का दिन श्री हनुमान जी की पूजा, सिंदूर अर्पण और हनुमान चालीसा पाठ के लिए मुख्य दिन है।शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा से शनि की साढ़ेसाती और ढैया के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
प्रातःकाल एवं संध्याकालप्रातःकाल और सायंकाल का संधिकाल संकट निवारण और हनुमान चालीसा पाठ हेतु सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।[Tulsidas / Ramacharitmanas Tradition]
ℹ️ प्रातःकाल और सायंकाल का समय हनुमान चालीसा पाठ के लिए सबसे फलदायी है।

दास्य भक्ति का सर्वोच्च शिखर

हनुमान जी दास्य भक्ति के साक्षात् स्वरूप हैं। उनका सारा जीवन केवल प्रभु श्री राम की सेवा में समर्पित रहा। जब माता सीता ने उन्हें बहुमूल्य मोतियों की माला भेंट की, तो उन्होंने यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि जिसमें मेरे प्रभु राम का नाम न हो, वह वस्तु मेरे किसी काम की नहीं। उन्होंने अपना सीना चीरकर दिखाया कि उनके हृदय में केवल सीताराम ही बसे हैं।

श्री हनुमान चालीसा: ४० चौपाइयों की दिव्य शक्ति

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित ४० चौपाइयों वाली 'हनुमान चालीसा' आज दुनिया भर में करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का संबल है। 'नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा'—यह पंक्तियां भय, रोग और निराशा को दूर कर आत्मविश्वास और शक्ति का संचार करती हैं।

ग्रह-दोष निवारक और संकटमोचन

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हनुमान जी की शरण में जाने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। लंका में जब हनुमान जी ने शनि देव को रावण के बंधन से मुक्त कराया, तब शनि देव ने वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी की सच्ची भक्ति करेगा, उस पर मेरी कुदृष्टि नहीं पड़ेगी।