✦ आज: कृष्ण पक्ष एकादशी· एकादशी · 1 दिन में· प्रदोष · 3 दिन में· अमावस्या · 5 दिन में· गणेश चतुर्थी · 8 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
TRIDEVI

लक्ष्मी

समृद्धि, ऐश्वर्य और अनुग्रह की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी

लक्ष्मी
पावन नामावली:महालक्ष्मीश्रीपद्माकमलाचंचलाभाग्यविधात्री

माँ महालक्ष्मी भगवान विष्णु की सहचरी और सुख-समृद्धि की देवी हैं। वे केवल भौतिक धन ही नहीं, बल्कि अष्ट-लक्ष्मी के रूप में सद्गुण, आरोग्य और आध्यात्मिक वैभव प्रदान करती हैं।

🪷

पवित्र ध्यान श्लोक

वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां हस्ताभ्यामभयप्रदां च वरदां लीलाशुकं बिभ्रतीम्। शंखं चक्रमुदारकुम्भकलशं पाशं च पद्मद्वयं बिभ्राणां नवयौवनां मणिलसद्धारां भजे वैष्णवीम्॥

vande padmakarāṁ prasannavadanāṁ saubhāgyadāṁ bhāgyadāṁ hastābhyāmabhayapradāṁ ca varadāṁ līlāśukaṁ bibhratīm | śaṅkhaṁ cakramudārakumbhakalaśaṁ pāśaṁ ca padmadvayaṁ bibhrāṇāṁ navayauvanāṁ maṇilasaddhārāṁ bhaje vaiṣṇavīm ||

भावार्थ: कमल के पुष्पों को धारण करने वाली, प्रसन्न मुख वाली, सौभाग्य और ऐश्वर्य देने वाली, अभय और वरदान देने वाली, मणियों की माला से सुशोभित भगवान विष्णु की प्रियतमा माँ महालक्ष्मी की मैं वंदना करता हूँ।

स्रोत: Sri Suktam Dhyanam / Puranic Lakshmi Upasana
दिव्य वाहनउलूक (श्वेत उल्लू) / गज (दिव्य श्वेत ऐरावत हाथी)अज्ञान के अंधकार में दृष्टि बनाए रखने और राजसी ऐश्वर्य का प्रतीक।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
पद्म (लाल व स्वर्ण कमल)कुंभ (अक्षय धन-धान्य का कलश)वरद मुद्रा से स्वर्ण-वर्षा
हस्त मुद्राएं
वरद मुद्राअभय मुद्रा
सहचरी / शक्तिविष्णु (नारायण)स्वरूप दर्शन →
📿

पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रSri Sukta / Vedic & Shakta Tradition
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमःसमस्त ऐश्वर्य और सौभाग्य की स्वामिनी माँ महालक्ष्मी को नमन।प्रयोग: दैनिक पूजा, दीपावली पूजन और शुक्रवार व्रत हेतु
गायत्री मंत्रMahanarayana Upanishad
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥हम महालक्ष्मी को जानते हैं, विष्णुपत्नी का ध्यान करते हैं; वे माँ लक्ष्मी हमारी बुद्धि को पवित्र और संपन्न बनाएं।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Sri Vidya / Shakta Tantra
श्रीं (Shreem)समस्त ऐश्वर्य, पवित्रता और लक्ष्मी तत्त्व को जाग्रत करने वाला 'श्रीं' बीज।ℹ️ श्रीविद्या और शाक्त उपासना में परम पूज्य।
🌐

जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (2)
🏔️ तीर्थ परिपथ (यात्रा)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: कार्तिक मास की अमावस्या को प्रदोष काल में दीपावली महालक्ष्मी पूजन का विधान है।आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) को कोजागरी लक्ष्मी पूजा का पर्व मनाया जाता है।
पूजन वार (दिन): शुक्रवार का दिन माँ महालक्ष्मी की उपासना, वैभव लक्ष्मी व्रत और खीर का भोग लगाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
प्रदोष काल (दीपावली महालक्ष्मी स्थापना)कार्तिक अमावस्या पर स्थिर लग्न युक्त प्रदोष काल माँ महालक्ष्मी की स्थायी कृपा और पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।[Dharmasindhu / Skanda Purana]
ℹ️ दीपावली की शाम का प्रदोष काल और शुक्रवार का प्रातःकाल लक्ष्मी पूजा हेतु श्रेष्ठतम मुहूर्त है।

समुद्र मंथन और माँ लक्ष्मी का प्राकट्य

पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय चौदह रत्नों में माँ लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ। वे क्षीरसागर के श्वेत जल से खिले हुए कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुईं। देवताओं और असुरों के बीच उन्होंने सत्य और धर्म के रक्षक भगवान विष्णु का वरण किया और उनके वक्षस्थल में निवास किया।

अष्ट-लक्ष्मी: जीवन के आठ प्रमुख वैभव

सनातन धर्म में धन का अर्थ केवल रुपया-पैसा नहीं है। माँ लक्ष्मी 'अष्टलक्ष्मी' के रूप में जीवन के आठ अंगों की अधिष्ठात्री हैं: आदि लक्ष्मी (शांति), धान्य लक्ष्मी (अन्न), धैर्य लक्ष्मी (साहस), गज लक्ष्मी (सम्मान), संतान लक्ष्मी (वंश), विजय लक्ष्मी (सफलता), विद्या लक्ष्मी (ज्ञान) और धन लक्ष्मी (समृद्धि)।

दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन

दीपावली की रात माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर-घर में दीये जलाए जाते हैं। स्वच्छता और पवित्रता माँ को अत्यंत प्रिय हैं। इस रात का पूजन केवल धन की लालसा नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार को मिटाकर जीवन में धर्म, संतोष और प्रेम का प्रकाश फैलाने का संकल्प है।