✦ आज: कृष्ण पक्ष एकादशी· एकादशी · 1 दिन में· प्रदोष · 3 दिन में· अमावस्या · 5 दिन में· गणेश चतुर्थी · 8 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
DASHAVATARA

राम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम — धर्म, सत्य और न्याय के परम आदर्श

राम
पावन नामावली:मर्यादा पुरुषोत्तमराघवेंद्ररामचंद्रदाशरथिकौसल्या-नंदनसीतापति

भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम धर्म और मर्यादा के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनका जीवन सत्य, त्याग, भ्रातृ-प्रेम और प्रजा-रंजन का अनुपम उदाहरण है।

🪷

पवित्र ध्यान श्लोक

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामांकारूढ़सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचंद्रम्॥

dhyāyedājānubāhuṁ dhṛtaśaradhanuṣaṁ baddhapadmāsanasthaṁ pītaṁ vāso vasānaṁ navakamaladalaspardhinetraṁ prasannam | vāmāṅkārūḍhasītāmukhakamalamilallocanaṁ nīradābhaṁ nānālaṅkāradīptaṁ dadhatamurujaṭāmaṇḍalaṁ rāmacandram ||

भावार्थ: जिनकी भुजाएं घुटनों तक लंबी हैं, जो धनुष-बाण धारण किए पद्मासन पर विराजमान हैं, पीले वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं, जिनकी दृष्टि बाईं गोद में बैठी जानकी जी के मुखकमल पर टिकी है, उन मेघवर्ण श्री रामचंद्र जी का ध्यान करें।

स्रोत: Ramaraksha Stotra Dhyanam (Budhakaushika)
दिव्य वाहनगरुड़ (एवं सूर्यवंशी दिव्य रथ)सूर्यवंश की प्रतिष्ठा और धर्म की अडिग गति।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
कोदंड धनुषबाण (सत्य और न्याय का संधान)खड्ग
हस्त मुद्राएं
अभय मुद्रा (शरणागत-वत्सल भाव)ज्ञान मुद्रा
सहचरी / शक्तिसीता (जानकी, वैदेही)
📿

पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रRamanandi Sampradaya / Valmiki Ramayana
ॐ श्री रामाय नमःमर्यादा और कल्याण के स्वामी श्री राम को नमन।प्रयोग: मानसिक शांति, धर्म-निष्ठा और चरित्र-बल हेतु दैनिक जप
गायत्री मंत्रVedic & Puranic
ॐ दाशरथाय विद्महे सीताprotallabhaya धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्॥हम दशरथ-नंदन को जानते हैं, जानकी-वल्लभ का ध्यान करते हैं; वे प्रभु राम हमारी बुद्धि को सन्मार्ग दिखाएं।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Rama Rahasya Upanishad
रां / राम (Ram)तारक मंत्र जो भवसागर से पार उतारने वाला है।ℹ️ परंपरा में शिव और नारायण महामंत्रों के सार रूप में मान्य।
🌐

जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (2)
🏔️ तीर्थ परिपथ (यात्रा)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को राम जन्मोत्सव (राम नवमी) के रूप में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।
पूजन वार (दिन): सूर्यवंश से संबंध होने के कारण रविवार तथा हनुमान जी के कारण मंगलवार को राम-स्मरण का विशेष फल है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
मध्याह्न काल (दोपहर १२ बजे)श्री राम का प्राकट्य चैत्र शुक्ल नवमी को ठीक दोपहर के मध्याह्न काल में हुआ था, जो राम जन्मोत्सव का पावन क्षण है।[Valmiki Ramayana & Smarta Canon]
ℹ️ दोपहर १२ बजे का मध्याह्न काल राम जन्मोत्सव का पावन मुहूर्त है।

मर्यादा पुरुषोत्तम: जीवन का आदर्श रूप

भगवान श्री राम ने अपनी ईश्वरीय शक्तियों का प्रदर्शन करने के बजाय एक सामान्य मनुष्य की मर्यादा में रहकर दिखाया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का पालन कैसे किया जाता है। एक आदर्श पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में उनका जीवन हर युग में अनुकरणीय है।

रामेश्वरम: हरि और हर का पावन संगम

लंका पर चढ़ाई करने से पहले श्री राम ने दक्षिण के सागर तट पर रेत से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की आराधना की। इसी से उस तीर्थ का नाम 'रामेश्वरम' पड़ा—जिसका अर्थ है 'राम के ईश्वर' और 'जिनके ईश्वर राम हैं'। यह धाम वैष्णव और शैव परंपरा की एकता का अद्वितीय प्रतीक है।

राम नवमी और दीपावली का पावन पर्व

चैत्र मास की राम नवमी पर रामजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। वहीं कार्तिक मास की अमावस्या को १४ वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद जब श्री राम अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने घी के दीये जलाकर स्वागत किया। यही दीपोत्सव आज 'दीपावली' के रूप में संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है।