✦ आज: कृष्ण पक्ष एकादशी· एकादशी · 1 दिन में· प्रदोष · 3 दिन में· अमावस्या · 5 दिन में· गणेश चतुर्थी · 8 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
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विष्णु

सृष्टि के पालनकर्ता और धर्म के संरक्षक श्री हरि

विष्णु
पावन नामावली:नारायणहरिवासुदेवपुरुषोत्तममाधवपद्मनाभ

भगवान विष्णु संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त धर्म के संरक्षक हैं। वे क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करते हैं और धर्म की रक्षा हेतु युग-युग में अवतार लेते हैं।

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पवित्र ध्यान श्लोक

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

śāntākāraṁ bhujagaśayanaṁ padmanābhaṁ sureśaṁ viśvādhāraṁ gaganasadṛśaṁ meghavarṇaṁ śubhāṅgam | lakṣmīkāntaṁ kamalanayanaṁ yogibhirdhyānagamyaṁ vande viṣṇuṁ bhavabhayaharaṁ sarvalokaikanātham ||

भावार्थ: जिनका स्वरूप शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो देवताओं के ईश्वर और जगत के आधार हैं, आकाश के समान अनंत और मेघवर्ण वाले, कमलनयन भगवान विष्णु को मैं नमन करता हूँ।

स्रोत: Vishnu Sahasranama Dhyanam
दिव्य वाहनगरुड़ (दिव्य पक्षीराज)वेदों के छंदों, गति और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
सुदर्शन चक्रपांचजन्य शंखकौमोदकी गदापद्म (कमल)
हस्त मुद्राएं
अभय मुद्रावरद मुद्रा
सहचरी / शक्तिलक्ष्मी (श्री, महालक्ष्मी)स्वरूप दर्शन →
📿

पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रDvadasakshari Mantra (Srimad Bhagavatam / Vishnu Purana)
ॐ नमो भगवते वासुदेवायमैं सर्वव्यापी परम प्रभु श्री वासुदेव को नमन करता हूँ।प्रयोग: सर्वकल्याणकारी एवं मोक्ष प्रदायक द्वादशाक्षर महामंत्र
गायत्री मंत्रMahanarayana Upanishad 3.15
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥हम नारायण को जानते हैं, वासुदेव का ध्यान करते हैं; श्री हरि विष्णु हमारी बुद्धि को आलोकित करें।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Pancharatra Agama / Tantrasara
दं (Dam)पालन और पोषण शक्ति का बीज मंत्र।ℹ️ आगम परंपरा में प्रयुक्त।
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जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (5)
🏔️ तीर्थ परिपथ (यात्रा)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की एकादशी तिथि भगवान विष्णु की साधना के लिए परम पवित्र है।द्वादशी तिथि एकादशी व्रत के पारण और दान-पुण्य के लिए शुभ मानी जाती है।
पूजन वार (दिन): गुरुवार (बृहस्पतिवार) को भगवान विष्णु और सत्यनारायण पूजन का विशेष विधान है।दक्षिण भारत में बुधवार को श्री वेंकटेश्वर स्वामी की आराधना की जाती है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
प्रातःकाल एवं अभिजीत मुहूर्तसूर्योदय का समय और दिन का आठवाँ अभिजीत मुहूर्त श्री हरि विष्णु की पूजा हेतु विजयकारी माना गया है।[Vaishnava Pancharatra]
ℹ️ अभिजीत मुहूर्त और प्रातःकाल श्री हरि की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

सृष्टि के पालक और धर्म-संस्थापक

सृष्टि की रचना और संहार के मध्य पालन-पोषण का कार्य भगवान विष्णु करते हैं। वे दया, धर्म और संतुलन के आधार हैं। गीता में भगवान ने कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब वे साधुओं की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं।

चार धाम और पावन वैष्णव पीठ

भारत के चारों कोनों में स्थित चार धाम—उत्तर में बद्रीनाथ, पूर्व में जगन्नाथ पुरी, पश्चिम में द्वारका और दक्षिण में रामेश्वरम—सनातन आस्था के केंद्र हैं। इनमें भगवान के विविध स्वरूपों की अलौकिक महिमा विद्यमान है।

एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू पंचांग में एकादशी व्रत को सभी व्रतों का राजा कहा गया है। महीने में दो बार आने वाला यह व्रत केवल अन्न-त्याग नहीं, बल्कि इंद्रियों का संयम और मन को पूरी तरह नारायण के चरणों में समर्पित करने का साधन है।