✦ आज: कृष्ण पक्ष एकादशी· एकादशी · 1 दिन में· प्रदोष · 3 दिन में· अमावस्या · 5 दिन में· गणेश चतुर्थी · 8 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
NAVAGRAHA

सूर्य

प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण — सृष्टि के प्राण, प्रकाश और काल के अधिष्ठाता

सूर्य
पावन नामावली:आदित्यभास्करसवितृदिवाकररविसूर्य नारायण

भगवान सूर्य प्रत्यक्ष रूप से दृश्य परमात्मा हैं। वे संपूर्ण जगत के नेत्र और जीवनदाता हैं। हिंदू पंचांग में हर दिन की गणना सूर्योदय से ही आरंभ होती है।

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पवित्र ध्यान श्लोक

पद्मासनः पद्मकरो द्विबाहुः पद्मद्युतिः सप्ततुरंगवाहनः। दिवाकरो लोकगुरुः किरीटी मयि प्रसादं विदधातु देवः॥

padmāsanaḥ padmakaro dvibāhuḥ padmadyutiḥ saptaturaṁgavāhanaḥ | divākaro lokaguruḥ kirīṭī mayi prasādaṁ vidadhātu devaḥ ||

भावार्थ: कमल के आसन पर विराजमान, दोनों हाथों में कमल पुष्प धारण किए हुए, कमल के समान कांति वाले, सात घोड़ों के रथ पर सवार, मुकुटधारी और संपूर्ण जगत के गुरु भगवान सूर्य मुझ पर कृपा करें।

स्रोत: Surya Dhyana Shloka (Aditya Hridaya Stotram / Puranic Liturgy)
दिव्य वाहनसात घोड़ों का स्वर्णिम रथ (सारथि अरुण देव)सूर्य के सात रंग, वेदों के सात छंद और सप्ताह के सात दिनों का प्रतीक।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
दो खिले हुए कमल पुष्प (जीवन और ज्ञान के प्रतीक)चक्र
हस्त मुद्राएं
वरद मुद्रा (आरोग्य एवं दीर्घायु)अभय मुद्रा
सहचरी / शक्तिसंज्ञा (दिव्य प्रकाश) एवं छाया
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पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रVedic Sauram Tradition
ॐ सूर्याय नमः / ॐ घृणिः सूर्याय नमःसमस्त संसार को प्रकाश और जीवन देने वाले भगवान सूर्य को नमन।प्रयोग: प्रातःकाल सूर्य को जल (अर्घ्य) देते समय जपनीय
गायत्री मंत्रMaha Gayatri Mantra (Rigveda 3.62.10)
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी पापनाशक देवस्वरूप सूर्य का ध्यान करते हैं; वह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Vedic Surya Tantra
ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः (Hram Hrim Hraum)सूर्य के षडंग बीज मंत्र जो नेत्र-ज्योति, ओज और आरोग्य प्रदान करते हैं।ℹ️ आदित्य हृदय पाठ और सूर्य नमस्कार के समय प्रयुक्त।
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जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (1)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को 'रथ सप्तमी' (सूर्य जयंती) के रूप में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है।कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाए जाने वाले छठ महापर्व में अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
पूजन वार (दिन): रविवार का दिन प्रत्यक्ष रूप से भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन बिना नमक का उपवास रखने से आरोग्य प्राप्त होता है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
सूर्योदय काल (प्रथम २ घटी / ४८ मिनट)सूर्योदय के प्रथम ४८ मिनट के भीतर तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य देना ओज, तेज और स्वास्थ्य वृद्धि का मूल स्रोत है।[Rigvedic Sauram & Surya Siddhanta]
ℹ️ सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करना स्वास्थ्य, तेज और नेत्र-ज्योति के लिए अमृत तुल्य माना गया है।

काल के स्वामी और पंचांग का मूलाधार

सनातन खगोल विज्ञान में सूर्य केवल एक तारा नहीं, बल्कि समय (कालचक्र) के नियामक हैं। हिंदू पंचांग में नया दिन मध्यरात्रि से नहीं, बल्कि सूर्योदय के क्षण से आरंभ होता है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की समस्त गणनाएं सूर्य की गति पर ही निर्भर हैं।

मकर संक्रांति और उत्तरायण का पावन पर्व

जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाता है। यहाँ से 'उत्तरायण' का आरंभ होता है, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। यह पर्व फसल के आगमन और गंगा-स्नान के साथ पूरे भारत में विभिन्न नामों (पोंगल, बिहू) से मनाया जाता है।

छठ महापर्व: प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता

छठ महापर्व स्वच्छता, सादगी और पर्यावरण-प्रेम का अद्वितीय उदाहरण है। इसमें डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य देकर यह संदेश दिया जाता है कि जो ढलता है, उसका उदय भी निश्चित है। यह पर्व सूर्य देवता और प्रकृति के प्रति निःस्वार्थ कृतज्ञता प्रकट करने का महापर्व है।