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अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
पाठ/श्लोक/Brihadaranyaka Upanishad
मंत्र २८ (पवमान अभ्यारोह)शास्त्रसम्मत प्रामाणिकवैदिक गद्य/पद्य साम मंत्रउपनिषद् के दृष्टा ऋषि

असतो मा सद्गमय (बृहदारण्यकोपनिषद् १.३.२८)

सत्य, आत्मिक प्रकाश एवं अमरत्व की शाश्वत उपनिषद् प्रार्थना — पवमान मंत्र

0:00 / 0:00Vedic Chanting with traditional Shanti Path recitation

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

पदार्थ (शब्द-दर-शब्द अर्थ)

असतःasataḥ
असत्य से, नश्वर संसार से
मा
मुझको, मुझे
सत्sat
सत्य की ओर, शाश्वत ब्रह्म की ओर
गमयgamaya
ले चलो, मार्ग दिखाओ
तमसःtamasaḥ
अज्ञान रूपी अंधकार से
ज्योतिःjyotiḥ
ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर
मृत्योःmṛtyoḥ
मृत्यु से, नश्वर संसार चक्र से
अमृतम्amṛtam
अमृतत्व की ओर, मोक्ष की ओर
शान्तिःśāntiḥ
शांति (आधिभौतिक, आधिदैविक, आध्यात्मिक तापों का शमन)

सरल हिंदी भावार्थ:

हे परमात्मा! मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो। मुझे अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले चलो। मुझे मृत्यु से अमरता (मोक्ष) की ओर ले चलो। ॐ, तीनों प्रकार के तापों (आधिभौतिक, आधिदैविक, आध्यात्मिक) की शांति हो।

English Translation:

Lead me from the unreal to the real. Lead me from darkness to light. Lead me from death to immortality. Om, peace, peace, peace.

प्रसंग एवं दार्शनिक तात्पर्य

पौराणिक / ऐतिहासिक प्रसंग

बृहदारण्यकोपनिषद् के पवमान आख्यान में यह अभ्यारोह (आरोहण / उत्थान) मंत्र आता है। स्वयं उपनिषद् में ही इसकी व्याख्या दी गई है: 'असत्' का अर्थ नश्वर व परिवर्तनशील संसार है और 'सत्' अविनाशी परब्रह्म है। 'तमस्' अज्ञान का अंधकार है और 'ज्योति' आत्मज्ञान का दिव्य प्रकाश है। 'मृत्यु' देहाध्यास का चक्र है और 'अमृत' परमानंदमय मोक्ष है।

जीवन दर्शन एवं साधना सूत्र

इस पावन प्रार्थना में साधना के तीन दिव्य सोपान हैं: (१) अनित्य असत्य से शाश्वत सत्य की ओर गमन, (२) अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर आरोहण, और (३) जन्म-मृत्यु रूपी नश्वरता से नित्य अमृत स्वरूप मोक्ष की प्राप्ति।

शास्त्र प्रमाण
मूल ग्रंथ:बृहदारण्यकोपनिषद्
अध्याय / पर्व:प्रथम अध्याय, तृतीय ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद)
श्लोक संदर्भ:मंत्र २८ (पवमान अभ्यारोह)
वक्ता:उपनिषद् के दृष्टा ऋषि
छंद:वैदिक गद्य/पद्य साम मंत्र