✦ आज: कृष्ण पक्ष एकादशी· एकादशी · 1 दिन में· प्रदोष · 3 दिन में· अमावस्या · 5 दिन में· गणेश चतुर्थी · 8 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
TRIDEVI

दुर्गा

दुर्गतिनाशिनी परम आदिशक्ति — अखिल ब्रह्मांड की जगज्जननी

दुर्गा
पावन नामावली:आदिशक्तिमहिषासुरमर्दिनीभवानीचंडिकाअम्बाजगदम्बा

माँ दुर्गा समस्त देवताओं के तेज से प्रकट हुई अपराजेय शक्ति हैं। वे अंधकार और क्लेश का नाश करने वाली हैं। ५१ शक्तिपीठों और नवरात्रि में इनकी विशेष आराधना होती है।

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पवित्र ध्यान श्लोक

विद्युद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभिः करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं विभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे॥

vidyuddāmasamaprabhāṁ mṛgapatiskandhasthitāṁ bhīṣaṇāṁ kanyābhiḥ karavālakheṭavilasaddhastābhirāsevitām | hastaiścakragadāsikheṭaviśikhāṁścāpaṁ guṇaṁ tarjanīṁ vibhrāṇāmanalātmikāṁ śaśidharāṁ durgāṁ trinetrāṁ bhaje ||

भावार्थ: बिजली के समान कांति वाली, सिंह के कंधे पर विराजमान, चक्र, गदा, तलवार, ढाल, बाण और धनुष धारण किए हुए, त्रिनेत्रा, चंद्रमा को मस्तक पर सजाने वाली माँ दुर्गा की मैं वंदना करता हूँ।

स्रोत: Devi Mahatmyam / Durga Saptashati Dhyanam
दिव्य वाहनसिंह / व्याघ्रअदम्य साहस, पराक्रम और पाशविक प्रवृत्तियों पर विजय का प्रतीक।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
त्रिशूल (शिव प्रदत्त)सुदर्शन चक्र (विष्णु प्रदत्त)खड्ग (तलवार)धनुष एवं बाण
हस्त मुद्राएं
अभय मुद्रावरद मुद्रा
सहचरी / शक्तिशिव (सदाशिव)स्वरूप दर्शन →
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पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रTantric & Puranic Shaktism
ॐ दुं दुर्गायै नमःसमस्त संकटों को हरने वाली माँ दुर्गा को प्रणाम।प्रयोग: संकट निवारण और आत्मबल वृद्धि हेतु दैनिक जप
गायत्री मंत्रMahanarayana Upanishad 3.12
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥हम कात्यायनी को जानते हैं, कन्याकुमारी का ध्यान करते हैं; वह दुर्गा हमारी बुद्धि को प्रेरणा प्रदान करे।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Shakta Tantra (Tantraraja Tantra / Sharada Tilaka)
दुं (Dum)माँ दुर्गा का बीज मंत्र जो दुर्गति और विपत्ति का नाश करता है।ℹ️ शाक्त परंपरा में गुरु-दीक्षा के साथ नवाक्षर मंत्र में प्रयुक्त।
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जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (2)
🏔️ तीर्थ परिपथ (यात्रा)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: शुक्ल पक्ष की अष्टमी (दुर्गाष्टमी) माँ दुर्गा की विशेष पूजा और उपवास के लिए प्रसिद्ध है।नवमी तिथि, विशेषकर महानवमी, महिषासुर पर देवी की विजय और कन्या पूजन का पावन दिन है।
पूजन वार (दिन): शुक्रवार का दिन देवी आराधना, वैभव-प्राप्ति और शक्ति साधना के लिए अत्यंत शुभ है।मंगलवार को भी माँ दुर्गा और चंडी रूप की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
संधिकाल (अष्टमी-नवमी संगम काल)अष्टमी के अंतिम २४ मिनट और नवमी के प्रथम २४ मिनट का संधि क्षण जब माँ ने चंड-मुंड का संहार किया था।[Shakta Agama & Devi Mahatmyam]
ℹ️ अष्टमी और नवमी के संधिकाल में की जाने वाली संधिकाल पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

महिषासुरमर्दिनी के रूप में प्राकट्य

जब महिषासुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित सभी देवताओं के सम्मिलित तेज से माँ दुर्गा का प्राकट्य हुआ। देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र देवी को भेंट किए। माँ ने सिंह पर सवार होकर महिषासुर का वध किया और धर्म की पुनः स्थापना की।

५१ शक्तिपीठ और पावन मातृभूमि

दक्ष प्रजापति के यज्ञ में सती के भस्म होने के बाद जब शिवजी उनके पार्थिव शरीर को लेकर चले, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके अंगों को विभक्त किया। जहाँ-जहाँ वे अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। ये ५१ धाम भारतीय संस्कृति की एकता और मातृशक्ति की जीवंत साक्षी हैं।

नवरात्रि के नौ पावन दिन

वर्ष में दो बार (चैत्र और शारदीय) मनाई जाने वाली नवरात्रि माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों (नवदुर्गा) की आराधना का पर्व है। यह व्रत, उपवास, भजन और अंतर्मुखी होकर आत्मबल को जागृत करने का पवित्र समय है।