✦ आज: कृष्ण पक्ष एकादशी· एकादशी · 1 दिन में· प्रदोष · 3 दिन में· अमावस्या · 5 दिन में· गणेश चतुर्थी · 8 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
TRIDEVA

शिव

परम कल्याणकारी महादेव — संहार और पुनर्जागरण के अधिपति

शिव
पावन नामावली:महादेवरुद्रनटराजशम्भुमहेश्वरभोलेनाथ

भगवान शिव शुद्ध चेतना, वैराग्य और असीम कृपा के साक्षात् स्वरूप हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंगों और हिमालयी धामों में इनकी प्रमुख उपासना है।

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पवित्र ध्यान श्लोक

ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥

dhyāyennityaṁ maheśaṁ rajatagirinibhaṁ cārucandrāvataṁsaṁ ratnākalpojjvalāṅgaṁ paraśumṛgavarābhītihastaṁ prasannam | padmāsīnaṁ samantāt stutamamaragaṇairvyāghrakṛttiṁ vasānaṁ viśvādyaṁ viśvabījaṁ nikhilabhayaharaṁ pañcavaktraṁ trinetram ||

भावार्थ: जो चांदी के पर्वत के समान कांतिमान हैं, जिनके मस्तक पर सुंदर चंद्रमा सुशोभित है, जो हाथ में परशु और मृग धारण किए अभय और वरद मुद्रा में हैं, व्याघ्रचर्मधारी, समस्त भयों को हरने वाले उन पंचमुख त्रिनेत्र महादेव का नित्य ध्यान करें।

स्रोत: Shiva Dhyanam (Puranic Liturgy)
दिव्य वाहननंदी (पवित्र वृषभ)धर्म, अडिग भक्ति और निरंतर ध्यान का प्रतीक।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
त्रिशूलडमरूपिनाक धनुषपाशुपतास्त्र
हस्त मुद्राएं
अभय मुद्रावरद मुद्राचिन्मुद्रा
सहचरी / शक्तिपार्वती (देवी, उमा, शक्ति)स्वरूप दर्शन →
📿

पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रPanchakshari Mantra (Krishna Yajurveda, Taittiriya Samhita 4.5.8)
ॐ नमः शिवायमैं परम कल्याणकारी शिव को नमन करता हूँ।प्रयोग: दैनिक जप और ध्यान के लिए सर्वमान्य महामंत्र
गायत्री मंत्रVedic (Mahanarayana Upanishad 3.16)
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥हम उस परम पुरुष को जानते हैं, महादेव का ध्यान करते हैं; वह रुद्र हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Tantric & Agamic (Linga Purana / Tantrasara)
हौं (Haum)अमृतत्व और शिव तत्त्व को जागृत करने वाला एकाक्षरी बीज।ℹ️ परंपरागत साधना में गुरु-मार्गदर्शन से प्रयुक्त।
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जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (12)
🏔️ तीर्थ परिपथ (यात्रा)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत के रूप में शिव-आराधना की जाती है।कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि तथा फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है।
पूजन वार (दिन): सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्र-साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
प्रदोष काल (सूर्यास्त के उपरांत संधिकाल)सूर्यास्त के तुरंत बाद का समय जब भगवान शिव आनंद तांडव करते हैं और समस्त पापों व ऋणों का नाश करते हैं।[Shaiva Agama & Purana]
ℹ️ सूर्यास्त के तुरंत बाद का प्रदोष काल शिव पूजन के लिए सबसे मंगलकारी समय है।

परम चेतना और वैराग्य का स्वरूप

भगवान शिव उस परम शून्य और चेतना के प्रतीक हैं जहाँ से सृष्टि प्रकट होती है और अंत में विलीन हो जाती है। वे कैलाश पर ध्यानावस्थित संन्यासी हैं, जो भस्म रमाते हैं और सर्पों को आभूषण रूप में धारण करते हैं। वे गति के पीछे की स्थिरता और मोक्ष प्रदान करने वाले परम गुरु हैं।

द्वादश ज्योतिर्लिंग और पवित्र तीर्थ परंपरा

पुराणों में बारह ज्योतिर्लिंगों का विशेष वर्णन है, जो सौराष्ट्र के सोमनाथ से लेकर हिमालय के केदारनाथ और दक्षिण के रामेश्वरम तक फैले हैं। ये पवित्र धाम सनातन तीर्थ यात्रा के मुख्य स्तंभ हैं।

पूजन विधि और व्रत परंपरा

भगवान शिव 'आशुतोष' कहलाते हैं, अर्थात जो सरलता से प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें बेलपत्र, जल, दूध और भस्म अत्यंत प्रिय हैं। प्रदोष व्रत, सोमवार व्रत और महाशिवरात्रि का उपवास मन की शुद्धि और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।