
तीर्थ यात्रा
शक्तिपीठ यात्रा (51 शक्तिपीठ)
Shakti Peetha Yatra
51 पावन शक्तिपीठ · भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, तिब्बत एवं श्रीलंका
51 शक्तिपीठों की यह पावन यात्रा सनातन धर्म की सबसे पूजनीय तीर्थ यात्राओं में से एक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जहाँ-जहाँ माता सती के पावन अंग और आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुए। प्रत्येक पीठ पर शक्ति स्वरूपा देवी के साथ भैरव जी रक्षक रूप में विराजमान हैं।
महाशक्ति का प्राकट्य: दक्ष यज्ञ और माता सती
The Cosmic Origin: Daksha Yajna and Devi Sati
शक्तिपीठों का संबंध प्रजापति दक्ष के यज्ञ और माता सती के आत्मत्याग से है। जब दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया, तब माता सती ने यज्ञ-अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। शोक और क्रोध में महादेव सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे। संसार को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभक्त कर दिया। जहाँ-जहाँ देवी के अंग और आभूषण गिरे, वे सभी स्थान पावन शक्तिपीठ बन गए।
शास्त्र परंपरा और निष्पक्ष शोध
Textual Traditions and Scholarly Framework
अनंतमार्ग पर हमने सभी 51 शक्तिपीठों की जानकारी शास्त्रसम्मत और निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत की है। विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में शक्ति, भैरव और स्थानों के नामों में जहाँ भिन्नता मिलती है, हमने दोनों परंपराओं का आदरपूर्वक उल्लेख किया है। जिन स्थानों को लेकर एक से अधिक मान्यताएँ हैं (जैसे रामगिरि, शर्करा आदि), वहाँ किसी एक मत को थोपने के बजाय सभी प्रामाणिक परंपराओं को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
साधना, नियम और यात्रा की तैयारी
Sadhana, Observance, and Spiritual Preparation
शक्तिपीठों की यात्रा केवल दर्शनीय स्थलों का भ्रमण नहीं, बल्कि एक गहरी आंतरिक साधना है। यात्रा के दौरान सात्विक भोजन, शुद्ध आचरण और मन की पवित्रता रखनी चाहिए। नवरात्र (चैत्र और शारदीय) के पावन दिनों में यहाँ दर्शन का विशेष फल मिलता है। यात्रा के समय दुर्गा सप्तशती, नवार्ण मंत्र या ललिता सहस्रनाम का जप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
तीर्थ स्थल
कामाख्या (कामाख्या मंदिर)
Kamakhya (Kamakhya Temple)
पीठ #1: यहाँ माता का योनि गिरा था। शक्ति: कामाख्या, भैरव: उमानंद। स्थान: कामाख्या मंदिर, Assam (India)।
कालिका (कालीघाट काली मंदिर)
Kalika (Kalighat Kali Temple)
पीठ #2: यहाँ माता का दाहिने पैर की चार उंगलियां गिरा था। शक्ति: कालिका, भैरव: नकुलेश। स्थान: कालीघाट काली मंदिर, West Bengal (India)।
विरजा (माँ विरजा मंदिर)
Viraja (Biraja Temple)
पीठ #3: यहाँ माता का नाभि गिरा था। शक्ति: विरजा, भैरव: श्वेत वराह। स्थान: माँ विरजा मंदिर, Odisha (India)।
त्रिपुर सुन्दरी (त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर)
Tripura Sundari (Soroshi) (Tripura Sundari Temple (Matabari))
पीठ #4: यहाँ माता का दाहिना पैर गिरा था। शक्ति: त्रिपुर सुन्दरी, भैरव: त्रिपुरेश। स्थान: त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर, Tripura (India)।
जयंती (नारतियांग दुर्गा मंदिर)
Jayanti (Nartiang Durga Temple)
पीठ #5: यहाँ माता का बाईं जंघा गिरा था। शक्ति: जयंती, भैरव: क्रमादीश्वर। स्थान: नारतियांग दुर्गा मंदिर, Meghalaya (India) (क्षेत्रीय शास्त्र परंपरा के अनुसार)।
विमला (किरीटेश्वरी) (माँ किरीटेश्वरी मंदिर)
Vimala (Kiriteshwari) (Maa Kiriteshwari Temple)
पीठ #6: यहाँ माता का किरीट (मुकुट) गिरा था। शक्ति: विमला (किरीटेश्वरी), भैरव: संवर्त। स्थान: माँ किरीटेश्वरी मंदिर, West Bengal (India)।
बहुला (बहुलाक्षी मंदिर)
Bahula (Bahula Temple)
पीठ #7: यहाँ माता का बायां हाथ गिरा था। शक्ति: बहुला, भैरव: भीरुक। स्थान: बहुलाक्षी मंदिर, West Bengal (India)।
मंगल चंडी (उजानी मंगल चंडी मंदिर)
Mangal Chandi (Ujani Mangal Chandi Temple)
पीठ #8: यहाँ माता का दाहिनी कलाई गिरा था। शक्ति: मंगल चंडी, भैरव: कपिलांबर। स्थान: उजानी मंगल चंडी मंदिर, West Bengal (India)।
युगाद्या (माँ युगाद्या मंदिर)
Yugadya (Jogadya) (Jogadya Temple)
पीठ #9: यहाँ माता का दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। शक्ति: युगाद्या, भैरव: क्षीरकंटक। स्थान: माँ युगाद्या मंदिर, West Bengal (India)।
भ्रामरी (भ्रामरी देवी मंदिर)
Bhramari (Bhramari Devi Temple)
पीठ #10: यहाँ माता का बायां पैर गिरा था। शक्ति: भ्रामरी, भैरव: अंबर। स्थान: भ्रामरी देवी मंदिर, West Bengal (India)।
कपालिनी (भीमरूपा) (बर्गभीमा मंदिर)
Kapalini (Bhimarupa) (Bargabhima Temple)
पीठ #11: यहाँ माता का बायां टखना गिरा था। शक्ति: कपालिनी (भीमरूपा), भैरव: सर्वानंद। स्थान: बर्गभीमा मंदिर, West Bengal (India)।
कुमारी (आनंदमयी मंदिर)
Kumari (Anandamayee Temple (Ratnavali))
पीठ #12: यहाँ माता का दाहिना कंधा गिरा था। शक्ति: कुमारी, भैरव: शिव। स्थान: आनंदमयी मंदिर, West Bengal (India) (क्षेत्रीय शास्त्र परंपरा के अनुसार)।
कालिका (नलाटेश्वरी मंदिर)
Kalika (Nalateshwari Temple)
पीठ #13: यहाँ माता का नली (गले की नली) गिरा था। शक्ति: कालिका, भैरव: योगेश। स्थान: नलाटेश्वरी मंदिर, West Bengal (India)।
महिषमर्दिनी (बक्रेश्वर मंदिर एवं उष्ण कुंड)
Mahishamardini (Bakreshwar Temple & Thermal Springs)
पीठ #14: यहाँ माता का भ्रू-मध्य (मन) गिरा था। शक्ति: महिषमर्दिनी, भैरव: वक्रनाथ। स्थान: बक्रेश्वर मंदिर एवं उष्ण कुंड, West Bengal (India)।
फुल्लरा (माँ फुल्लरा मंदिर)
Phullara (Fullara Temple)
पीठ #15: यहाँ माता का निचला ओष्ठ गिरा था। शक्ति: फुल्लरा, भैरव: विश्वेश। स्थान: माँ फुल्लरा मंदिर, West Bengal (India)।
नंदिनी (नंदिकेश्वरी मंदिर)
Nandini (Nandikeshwari Temple)
पीठ #16: यहाँ माता का हार / कंठहार गिरा था। शक्ति: नंदिनी, भैरव: नंदिकेश्वर। स्थान: नंदिकेश्वरी मंदिर, West Bengal (India)।
अम्बिका (सिद्धिदा / ज्वालामुखी) (ज्वालामुखी देवी मंदिर)
Ambika (Siddhida / Jwalamukhi) (Jwalamukhi Temple)
पीठ #17: यहाँ माता का जिह्वा (जीभ) गिरा था। शक्ति: अम्बिका (सिद्धिदा / ज्वालामुखी), भैरव: उन्मत्त। स्थान: ज्वालामुखी देवी मंदिर, Himachal Pradesh (India)।
त्रिपुरामालिनी (देवी तालाब मंदिर)
Tripuramalini (Devi Talab Mandir)
पीठ #18: यहाँ माता का वाम स्तन गिरा था। शक्ति: त्रिपुरामालिनी, भैरव: भीषण। स्थान: देवी तालाब मंदिर, Punjab (India)।
महामाया (अमरनाथ गुफा / महामाया पीठ)
Mahamaya (Amarnath Cave / Mahamaya shrine (primary ritual seat in modern pilgrimage))
पीठ #19: यहाँ माता का कंठ (गला) गिरा था। शक्ति: महामाया, भैरव: त्रिसन्ध्येश्वर। स्थान: अमरनाथ गुफा / महामाया पीठ, Jammu & Kashmir (India)।
सावित्री (भद्रकाली) (श्री देवी भद्रकाली मंदिर (थानेसर))
Savitri (Bhadrakali) (Shree Devi Bhadrakali Mandir (Historical Sthaneshwar / Thanesar))
पीठ #20: यहाँ माता का दायां टखना (गुल्फ) गिरा था। शक्ति: सावित्री (भद्रकाली), भैरव: स्थाणु। स्थान: श्री देवी भद्रकाली मंदिर (थानेसर), Haryana (India)।
ललिता (अलोपी देवी मंदिर / ललिता देवी मंदिर)
Lalita (Alopi Devi Mandir / Lalita Devi Mandir)
पीठ #21: यहाँ माता का हस्त अंगुली (हाथ की अंगुलियां) गिरा था। शक्ति: ललिता, भैरव: भव। स्थान: अलोपी देवी मंदिर / ललिता देवी मंदिर, Uttar Pradesh (India)।
विशालाक्षी (माँ विशालाक्षी मंदिर (मीर घाट))
Vishalakshi (Maa Vishalakshi Mandir (Mir Ghat))
पीठ #22: यहाँ माता का कुंडल / कर्णभूषण (मणिकर्णिका) गिरा था। शक्ति: विशालाक्षी, भैरव: काल भैरव। स्थान: माँ विशालाक्षी मंदिर (मीर घाट), Uttar Pradesh (India)।
उमा (कात्यायनी) (कात्यायनी पीठ मंदिर)
Uma (Katyayani) (Katyayani Peeth Mandir (Uma Shaktipeeth))
पीठ #23: यहाँ माता का केशपाश / चूडामणि गिरा था। शक्ति: उमा (कात्यायनी), भैरव: भूतेश। स्थान: कात्यायनी पीठ मंदिर, Uttar Pradesh (India)।
शिवानी (रामगिरि (चित्रकूट / जानकी कुंड))
Shivani (Ramgiri (Chitrakoot / Janaki Kund axis))
पीठ #24: यहाँ माता का दायां स्तन गिरा था। शक्ति: शिवानी, भैरव: चण्ड। स्थान: रामगिरि (चित्रकूट / जानकी कुंड), Madhya Pradesh / Uttar Pradesh (India) (स्थान पर विभिन्न विद्वानों व परंपराओं के अलग-अलग मत हैं)।
नर्मदा (नर्मदा उद्गम मंदिर / सोनाक्षी मंदिर)
Narmada (Narmada Udgam Mandir / Sonakshi Temple)
पीठ #25: यहाँ माता का दायां नितंब गिरा था। शक्ति: नर्मदा, भैरव: भद्रसेन। स्थान: नर्मदा उद्गम मंदिर / सोनाक्षी मंदिर, Madhya Pradesh (India)।
काली (कालमाधव शक्तिपीठ)
Kali (Kalmadhava (Son River Source / Amarkantak-Bilaspur axis))
पीठ #26: यहाँ माता का बायां नितंब गिरा था। शक्ति: काली, भैरव: असितांग। स्थान: कालमाधव शक्तिपीठ, Madhya Pradesh / Chhattisgarh (India) (क्षेत्रीय शास्त्र परंपरा के अनुसार)।
अवंती (माँ हरसिद्धि मंदिर / भैरवगढ़)
Avanti (Maa Harsiddhi Mandir / Bhairavparvat (Bhairavgarh))
पीठ #27: यहाँ माता का ऊपरी होंठ (ओष्ठ) गिरा था। शक्ति: अवंती, भैरव: लम्बकर्ण। स्थान: माँ हरसिद्धि मंदिर / भैरवगढ़, Madhya Pradesh (India)।
भ्रामरी (भद्रकाली मंदिर (नासिक) / सप्तशृंगी देवी (वणी))
Bhramari (Bhadrakali Mandir (Nashik) / Saptashrungi (Vani))
पीठ #28: यहाँ माता का ठोड़ी (चिबुक) गिरा था। शक्ति: भ्रामरी, भैरव: विकृताक्ष। स्थान: भद्रकाली मंदिर (नासिक) / सप्तशृंगी देवी (वणी), Maharashtra (India)।
चंद्रभागा (चंद्रभागा शक्तिपीठ (सोमनाथ))
Chandrabhaga (Chandrabhaga Shakti Peeth / Somnath complex)
पीठ #29: यहाँ माता का उदर (पेट) गिरा था। शक्ति: चंद्रभागा, भैरव: वक्रतुण्ड। स्थान: चंद्रभागा शक्तिपीठ (सोमनाथ), Gujarat (India)।
गायत्री (चामुंडा माता मंदिर / गायत्री शक्तिपीठ)
Gayatri (Chamunda Mata Mandir / Gayatri Peeth (Manibandh Hill))
पीठ #30: यहाँ माता का मणिबंध (दोनों कलाई) गिरा था। शक्ति: गायत्री, भैरव: सर्वानंद। स्थान: चामुंडा माता मंदिर / गायत्री शक्तिपीठ, Rajasthan (India)।
अम्बिका (अम्बिका मंदिर, विराटनगर (बैराठ))
Ambika (Ambika Mandir / Viratnagar (Bairat))
पीठ #31: यहाँ माता का बाएं पैर की उंगलियां गिरा था। शक्ति: अम्बिका, भैरव: अमृत। स्थान: अम्बिका मंदिर, विराटनगर (बैराठ), Rajasthan (India)।
उमा (उच्चैठ भगवती / जानकी मंदिर अक्ष)
Uma (Uchaith Bhagawati / Janaki Mandir axis (Mithilanchal))
पीठ #32: यहाँ माता का बायां कंधा (वाम स्कंध) गिरा था। शक्ति: उमा, भैरव: महोदर। स्थान: उच्चैठ भगवती / जानकी मंदिर अक्ष, Bihar / Madhesh Province (India / Nepal border region) (क्षेत्रीय शास्त्र परंपरा के अनुसार)।
जयदुर्गा (बाबा वैद्यनाथ धाम (पार्वती मंदिर))
Jai Durga (Baba Baidyanath Dham (Parvati Mandir))
पीठ #33: यहाँ माता का हृदय (कमल) गिरा था। शक्ति: जयदुर्गा, भैरव: वैद्यनाथ। स्थान: बाबा वैद्यनाथ धाम (पार्वती मंदिर), Jharkhand (India)।
भ्रमराम्बा (भ्रामरी) (भ्रमराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी देवस्थानम्)
Bhramaramba (Bhramari) (Bhramaramba Mallikarjuna Swamy Temple)
पीठ #34: यहाँ माता का ग्रीवा (गर्दन) / नासा गिरा था। शक्ति: भ्रमराम्बा (भ्रामरी), भैरव: शम्बरानंद (मल्लिकार्जुन)। स्थान: भ्रमराम्बा मल्लिकार्जुन स्वामी देवस्थानम्, Andhra Pradesh (India)।
देवगर्भ (कामाक्षी) (श्री कामाक्षी अम्मन मंदिर)
Devagarbha (Kamakshi) (Shree Kamakshi Amman Temple)
पीठ #35: यहाँ माता का कंकाल / अस्थि गिरा था। शक्ति: देवगर्भ (कामाक्षी), भैरव: रुरु। स्थान: श्री कामाक्षी अम्मन मंदिर, Tamil Nadu (India)।
विश्वमातृका (राकिणी / सर्वशैलि) (श्री सर्वशैलि / कोटिलिंगेश्वर मंदिर)
Vishwamatrika (Rakini / Sarvashaili) (Shree Sarvashaili / Kotilingeshwara Mandir (Godavari Ghat))
पीठ #36: यहाँ माता का गाल (गण्ड) गिरा था। शक्ति: विश्वमातृका (राकिणी / सर्वशैलि), भैरव: दण्डपाणि (वत्सनाभ)। स्थान: श्री सर्वशैलि / कोटिलिंगेश्वर मंदिर, Andhra Pradesh (India)।
शर्वाणी (भगवती अम्मन मंदिर (कन्याकुमारी))
Sharvani (Bhagavathi Amman Temple (Kanyakumari))
पीठ #37: यहाँ माता का पीठ / रीढ़ (पृष्ठ) गिरा था। शक्ति: शर्वाणी, भैरव: निमिष। स्थान: भगवती अम्मन मंदिर (कन्याकुमारी), Tamil Nadu (India)।
जयदुर्गा (श्री चामुंडेश्वरी मंदिर (चामुंडी पहाड़ी))
Jayadurga (Shri Chamundeshwari Temple (Chamundi Hill))
पीठ #38: यहाँ माता का दोनों कान (कर्णयुग्म) गिरा था। शक्ति: जयदुर्गा, भैरव: भीरु / अभिरु। स्थान: श्री चामुंडेश्वरी मंदिर (चामुंडी पहाड़ी), Karnataka (India)।
कोट्टरी (हिंगलाज देवी) (हिंगलाज माता मंदिर (हिंगोल))
Kottari (Hinglaj Devi) (Hinglaj Mata Mandir (Hingol National Park))
पीठ #39: यहाँ माता का ब्रह्मरंध्र (सिर का शिखर) गिरा था। शक्ति: कोट्टरी (हिंगलाज देवी), भैरव: भीमलोचन। स्थान: हिंगलाज माता मंदिर (हिंगोल), Balochistan (Pakistan)।
महिषमर्दिनी (शर्करा पीठ (सक्कर / रोहड़ी, सिंध))
Mahishamardini (Sharkara (Sukkur / Rohri limestone hills) [Textual primary])
पीठ #40: यहाँ माता का त्रिनेत्र (तीनों नेत्र) गिरा था। शक्ति: महिषमर्दिनी, भैरव: क्रोधीश। स्थान: शर्करा पीठ (सक्कर / रोहड़ी, सिंध), Sindh (Pakistan) (स्थान पर विभिन्न विद्वानों व परंपराओं के अलग-अलग मत हैं)।
सुनंदा (सुगंधा) (उग्रतारा सुगंधा शक्तिपीठ)
Sunanda (Sugandha) (Ugradhara Sugandha Shaktipith (Shikarpur))
पीठ #41: यहाँ माता का नासिका (नाक) गिरा था। शक्ति: सुनंदा (सुगंधा), भैरव: त्र्यंबक। स्थान: उग्रतारा सुगंधा शक्तिपीठ, Barisal Division (Bangladesh)।
भवानी (चंद्रनाथ मंदिर / भवानी पीठ (सीताकुंड))
Bhavani (Chandranath Temple / Bhavani Mandir (Sitakunda))
पीठ #42: यहाँ माता का दाहिना हाथ (दाहिनी भुजा) गिरा था। शक्ति: भवानी, भैरव: चंद्रशेखर। स्थान: चंद्रनाथ मंदिर / भवानी पीठ (सीताकुंड), Chittagong Division (Bangladesh)।
अपर्णा (भवानीपुर शक्तिपीठ मंदिर)
Aparna (Bhabanipur Shakti Peeth Mandir)
पीठ #43: यहाँ माता का वाम नूपुर (बायां पायल / आभूषण) गिरा था। शक्ति: अपर्णा, भैरव: वामन। स्थान: भवानीपुर शक्तिपीठ मंदिर, Rajshahi Division (Bangladesh)।
यशोरेश्वरी (यशोरेश्वरी काली मंदिर (ईश्वरीपुर))
Yashoreshwari (Jeshoreswari Kali Temple (Ishwaripur))
पीठ #44: यहाँ माता का हाथ और पैरों की हथेलियां (पाणि-पाद) गिरा था। शक्ति: यशोरेश्वरी, भैरव: चण्ड। स्थान: यशोरेश्वरी काली मंदिर (ईश्वरीपुर), Khulna Division (Bangladesh)।
महाशिरा (गुह्येश्वरी) (गुह्येश्वरी मंदिर (बागमती तट))
Mahashira (Guhyeshwari) (Guhyeshwari Mandir (Bagmati riverbank))
पीठ #45: यहाँ माता का दोनों घुटने (जानुयुग्म) गिरा था। शक्ति: महाशिरा (गुह्येश्वरी), भैरव: कपाली। स्थान: गुह्येश्वरी मंदिर (बागमती तट), Bagmati Province (Nepal)।
गंडकी चंडी (मुक्तिनाथ मंदिर एवं ज्वाला माई (गंडकी घाटी))
Gandaki Chandi (Muktinath Temple & Jwala Mai shrine (Gandaki river valley))
पीठ #46: यहाँ माता का मस्तक / ललाट (गंडस्थल) गिरा था। शक्ति: गंडकी चंडी, भैरव: चक्रपाणि। स्थान: मुक्तिनाथ मंदिर एवं ज्वाला माई (गंडकी घाटी), Gandaki Province (Nepal)।
दाक्षायणी (मानसरोवर झील (कैलाश-मानसरोवर))
Dakshayani (Lake Manasarovar (Mapam Yumtso, Chiu Gompa axis))
पीठ #47: यहाँ माता का दाहिना हाथ (दाहिना कर/हथेली) गिरा था। शक्ति: दाक्षायणी, भैरव: हर। स्थान: मानसरोवर झील (कैलाश-मानसरोवर), Tibet Autonomous Region (China)।
इंद्राक्षी (नैनतिवु नागपूषणी अम्मन / त्रिंकोमाली शांकरी देवी)
Indrakshi (Nainativu Nagapooshani Amman / Trincomalee Shankari Devi axis)
पीठ #48: यहाँ माता का नूपुर (पायल) गिरा था। शक्ति: इंद्राक्षी, भैरव: राक्षसेश्वर। स्थान: नैनतिवु नागपूषणी अम्मन / त्रिंकोमाली शांकरी देवी, Northern / Eastern Province (Sri Lanka)।
वाराही (पंचसागर (वाराही मंदिर, वाराणसी / हरिद्वार / चौड़ासी अक्ष))
Varahi (Panchasagar (Varanasi Varahi Devi Mandir / Haridwar / Chaurasi axis))
पीठ #49: यहाँ माता का निचले दांत (अधोदंत) गिरा था। शक्ति: वाराही, भैरव: महारुद्र। स्थान: पंचसागर (वाराही मंदिर, वाराणसी / हरिद्वार / चौड़ासी अक्ष), Uttar Pradesh (India) (स्थान पर विभिन्न विद्वानों व परंपराओं के अलग-अलग मत हैं)।
श्रीसुंदरी (श्रीपर्वत शक्तिपीठ)
Shrisundari (Shriparvata (Ladakh / Srisailam / Sylhet border dispute))
पीठ #50: यहाँ माता का दायां टखना (दाहिना गुल्फ) गिरा था। शक्ति: श्रीसुंदरी, भैरव: सुंदरानंद। स्थान: श्रीपर्वत शक्तिपीठ, Disputed multi-region (India / Bangladesh) (स्थान पर विभिन्न विद्वानों व परंपराओं के अलग-अलग मत हैं)।
नारायणी (स्थाणुमालयन मंदिर (शुचींद्रम))
Narayani (Thanumalayan Temple (Suchindram))
पीठ #51: यहाँ माता का ऊपरी दांत (ऊर्ध्वदंत) गिरा था। शक्ति: नारायणी, भैरव: संहार। स्थान: स्थाणुमालयन मंदिर (शुचींद्रम), Tamil Nadu (India)।
यात्रा की जानकारी
तीर्थयात्री सामान्यतः अपने कुल या क्षेत्र की देवी अथवा कामाख्या देवी (प्रमुख शक्तिपीठ) से यात्रा प्रारंभ करते हैं। पूरी 51 पीठों की यात्रा को अपनी सुविधा अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर पूरा किया जा सकता है। भारत से बाहर स्थित पीठों (हिंगलाज, मानसरोवर, गुह्येश्वरी, बांग्लादेश और श्रीलंका) की यात्रा के लिए पासपोर्ट और जरूरी वीज़ा की पहले से तैयारी कर लें।
क्षेत्रीय स्तर पर पूरे वर्ष यात्रा की जा सकती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दिन सबसे शुभ माने जाते हैं। मैदानी और तटीय क्षेत्रों की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे आरामदायक रहता है।
यदि सभी 51 पीठों की पूरी यात्रा एक साथ की जाए तो लगभग 35 से 45 दिन लगते हैं। क्षेत्रवार (जैसे उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम) अलग-अलग यात्रा करने पर प्रत्येक भाग में 9 से 14 दिन का समय लगता है।
संबंधित मंदिर
स्रोत
- Pithanirnaya (Mahapithanirupana) — Critical Text edited by Dr. D.C. Sircar (1948)(scripture)
- The Shakta Pithas by Dr. Dines Chandra Sircar, Royal Asiatic Society of Bengal(reference)
- Kalika Purana & Devi Bhagavata Purana (Gita Press editions)(scripture)
- Archaeological Survey of India (ASI) Monument Chronicles(historical)
- Respective Shrine Devasthanams (Kamakhya, Srisailam, Baidyanath, Somnath, Kashi Vishwanath)(official)