✦ आज: कृष्ण पक्ष एकादशी· एकादशी · 1 दिन में· प्रदोष · 3 दिन में· अमावस्या · 5 दिन में· गणेश चतुर्थी · 8 दिन में
अनन्तमार्गडिजिटल पंचांग
GANAPATYA

गणेश

प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता — समस्त कार्यों के सिद्धिकर्ता

गणेश
पावन नामावली:विघ्नहर्ताविनायकगणपतिएकदंतगजाननलंबोदर

भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं। वे समस्त विघ्नों को हरने वाले, बुद्धि और विवेक के प्रदाता तथा रिद्धि-सिद्धि के स्वामी हैं।

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पवित्र ध्यान श्लोक

खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम्। दन्ताघातविदारितारिरुधिरैः सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम्॥

kharvaṁ sthūlatanuṁ gajendravadanaṁ lambodaraṁ sundaraṁ prasyandanmadagandhalubdhamadhupavyālolagaṇḍasthalam | dantāghātavidāritārirudhiraiḥ sindūraśobhākaraṁ vande śailasutāsutaṁ gaṇapatiṁ siddhipradaṁ kāmadam ||

भावार्थ: छोटे कद और विशाल शरीर वाले, गजमुख, लंबोदर और सुंदर, पार्वती-नंदन भगवान श्री गणेश को मैं प्रणाम करता हूँ, जो सभी सिद्धियों को देने वाले और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले हैं।

स्रोत: Ganesha Sahasranama / Mudgala Purana
दिव्य वाहनमूषक (चूहा)मन की चंचलता, सूक्ष्म शंकाओं और अहंकार पर नियंत्रण का प्रतीक।
दिव्य आयुध (अस्त्र-शस्त्र)
परशु (कुल्हाड़ी - मोह काटने हेतु)पाश (मन को एकाग्र करने हेतु)मोदक (आनंद का प्रतीक)खंडित दंत (लेखन और त्याग का प्रतीक)
हस्त मुद्राएं
अभय मुद्रावरद मुद्रा
सहचरी / शक्तिरिद्धि (समृद्धि) एवं सिद्धि (अलौकिक क्षमता)
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पावन मंत्र एवं साधना विधान

मूल महामंत्रGanapatya Agama / Vedic Atharvashirsha
ॐ गं गणपतये नमःसमस्त गणों के स्वामी विघ्नहर्ता भगवान गणेश को नमन।प्रयोग: किसी भी नए कार्य, अध्ययन या पूजा के आरंभ में शुभता हेतु
गायत्री मंत्रGanapati Atharvashirsha
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥हम एकदंत को जानते हैं, वक्रतुंड का ध्यान करते हैं; वे गजानन हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
एकाक्षरी बीज मंत्र (परंपरा-सापेक्ष)Tantric Ganapatya
गं / ग्लौं (Gam / Gloum)मूलाधार चक्र को जाग्रत करने वाला गणेश बीज मंत्र।ℹ️ तांत्रिक एवं वैदिक अनुष्ठान में प्रयुक्त।
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जुड़ा हुआ ज्ञान तंत्र (संबंधित तीर्थ एवं साधना)

अनन्तमार्ग के मंदिरों, तीर्थों, पर्वों, व्रतों और स्तोत्रों से सीधा संबंध
🛕 प्रमुख मंदिर (3)
🏔️ तीर्थ परिपथ (यात्रा)
🎉 प्रमुख पर्व एवं उत्सव
🌿 उपवास एवं व्रत
📖 आरती, चालीसा एवं स्तोत्र
पंचांग काल-मुहूर्त संबंध (प्रमाणित परंपरा)
संबंधित तिथियां: चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। शुक्ल चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और कृष्ण चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है।
पूजन वार (दिन): बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा, दूर्वा अर्पण और बुद्धि-वृद्धि के लिए श्रेष्ठ माना गया है।मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहते हैं, जो अत्यंत फलदायी है।
पावन दैनिक काल-खंड (मुहूर्त):
मध्याह्न काल (दोपहर का समय)श्री गणेश का प्राकट्य दोपहर के समय हुआ था, अतः मध्याह्न काल ही गणेश स्थापना और मुख्य पूजन का शास्त्रीय समय है।[Ganapatya Agama & Dharmasindhu]
ℹ️ गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश का प्राकट्य पूजन मध्याह्न काल (दोपहर) में किया जाता है।

प्रथम पूज्य का वरदान: गणेश जी की सर्वप्रथम पूजा क्यों?

किसी भी शुभ कार्य या यज्ञ में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है। पौराणिक कथा के अनुसार जब देवताओं में संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा की होड़ लगी, तब कार्तिकेय अपने मयूर पर उड़ चले। वहीं गणेश जी ने अपने माता-पिता शिव-पार्वती की परिक्रमा कर यह सिद्ध किया कि माता-पिता के चरणों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड है। उनके इस विवेक से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें 'प्रथम पूज्य' का वरदान दिया।

महाभारत के लेखक और ज्ञान के संरक्षक

महर्षि वेदव्यास जब महाभारत जैसे महाग्रंथ की रचना कर रहे थे, तो उन्हें एक ऐसे लेखक की आवश्यकता थी जो निरंतर लिख सके। गणेश जी ने यह कार्य स्वीकार किया। लिखते समय जब उनकी लेखनी टूट गई, तो उन्होंने बिना रुके अपना एक दांत तोड़कर लिखना जारी रखा। इसी से वे 'एकदंत' कहलाए।

संकष्टी चतुर्थी और व्रत का विधान

कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आने वाली संकष्टी चतुर्थी का व्रत अत्यंत लोकप्रिय है। इस दिन श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर गणेश जी का स्मरण करते हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन व अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। यह व्रत जीवन के संकटों और तनाव को दूर करने में सहायक है।